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संस्कृति की झलक के साथ जायके का संगम, जंबूरी में बिखरी जम्मू से केरल तक की खुशबू मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन, लोगों ने चखे देशभर के व्यंजन।

लीलाधर साहू

गुण्डरदेही।

राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी के तीसरे दिन दुधली में देशभर की संस्कृति, परंपरा और पारंपरिक व्यंजनों का अद्भुत संगम देखने को मिला। जंबूरी परिसर में विभिन्न राज्यों के खान-पान की खुशबू ने सभी को आकर्षित किया और प्रतिभागियों व दर्शकों को जम्मू-कश्मीर से लेकर केरल तक के जायकों से रूबरू कराया। प्रतिभागियों ने बताया कि जंबूरी उनके राज्य की संस्कृति एवं पारंपरिक खान-पान को पहचान दिलाने का प्रभावी मंच बना है। साथ ही यह आयोजन एक-दूसरे की सांस्कृतिक विविधता को समझने और आत्मसात करने का भी बेहतर माध्यम सिद्ध हो रहा है।

इस दौरान उत्तराखंड की लाल चावल की खीर, भटकी चूड़कानी एवं बाल मिठास, उत्तर प्रदेश की बाटी-चोखा, तमिलनाडु की स्वीट पोंगल, कर्नाटक की चुरमुरे, गन पाउडर एवं हुलीगुथी, मध्यप्रदेश की मालिदा, हरियाणा की पारंपरिक सब्जी, जम्मू-कश्मीर की कश्मीरी कहवा एवं कांगड़ी, पश्चिम बंगाल की नारियल-कद्दू व खजूर-गुड़, ओडिशा की चना साग, तथा केरल की विभिन्न चावल आधारित पारंपरिक व्यंजन लोगों के आकर्षण का केंद्र रहे। इन व्यंजनों के स्वाद ने दर्शकों को अपनी ओर खींच लिया और हर स्टॉल पर उत्साह देखने को मिला।

पारंपरिक लोकवेश और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां बनीं आकर्षण का केंद्र

बालोद के दुधली में आयोजित राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी में पारंपरिक लोकवेश एवं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देखते ही बन रही थीं। उत्तराखंड, ओडिशा, साउथ ईस्ट रेलवे, बिहार, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश सहित विभिन्न राज्यों के प्रतिभागियों ने अपनी-अपनी पारंपरिक वेशभूषा में लोकनृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मन मोह लिया। इस अवसर पर साउथ ईस्ट रेलवे द्वारा प्रस्तुत नाल्लामला फॉरेस्ट ट्राइबल डांस, उत्तराखंड का पारंपरिक पहाड़ी नृत्य, राजस्थान की रंग-बिरंगी वेशभूषा में लोकनृत्य, तथा हिमाचल प्रदेश की देवता झलक के साथ सामूहिक नृत्य ने जंबूरी मंच को जीवंत कर दिया। इन मनमोहक प्रस्तुतियों से पूरा जंबूरी परिसर सांस्कृतिक रंगों से सराबोर नजर आया। प्रतिभागियों ने कहा कि छत्तीसगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी अत्यंत बेहतर, यादगार अनुभव प्रदान कर रही है।

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