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नव चेतना समाजसेवी संगठन ने मूक-बधिर बच्चों के साथ मनाई अपनत्व की स्नेहमयी होली।

लीलाधर साहू

गुण्डरदेही।

बालोद। नव चेतना समाजसेवी संगठन ने अपने आदर्श वाक्य “सेवा ही सर्वोत्तम धर्म है” को जीवन-दर्शन मानते हुए पुनः यह सिद्ध किया कि सच्ची सेवा वही है, जिसमें संवेदना और समर्पण का संगम हो। प्रकृति-प्रेम, संरक्षण, जीव-दया, सामाजिक सेवा तथा धर्म एवं संस्कृति-संरक्षण जैसे पुनीत उपक्रमों के माध्यम से संगठन निरंतर समाज में करुणा, चेतना और उत्तरदायित्व-बोध का भी प्रज्वलित कर रहा है।

इसी भावधारा के अंतर्गत संगठन की बहनों ने जय स्तंभ चौक स्थित “घरौंदा” (मूक-बधिर केंद्र) में विशेष बच्चों के साथ स्नेह, आत्मीयता और अपनत्व की रंगभरी होली मनाई। बहनों ने बच्चों के बीच पहुँचकर पहले हर्बल गुलाल से उनके कपोलों को स्पर्श किया और फिर प्रेम के रंगों से वातावरण को सरस बना दिया। क्षण भर में ही मासूम चेहरों पर प्रसन्नता की लाली खिल उठी और परिसर हर्षोल्लास से गूंजायमान हो गया।

संगठन की ओर से बच्चों को मिठाइयाँ एवं विविध पकवान स्नेहपूर्वक परोसे गए। इस अवसर को और भी विशेष बनाते हुए संगठन की सचिव डिलेश्वरी साहू ने बच्चों के साथ अपना जन्मदिन मनाया। केक काटते समय उनकी आँखें भाव-विभोर हो उठीं। उन्होंने इसे अपने जीवन का सर्वाधिक स्मरणीय जन्मदिन बताते हुए संगठन की अध्यक्ष पद्मिनी देवेंद्र साहू के प्रति हृदय से आभार प्रकट किया, जिनके सहयोग से उन्हें यह अनुपम अवसर प्राप्त हुआ।

इस होली मिलन समारोह में संयोजिका पद्मिनी देवेंद्र साहू, सहसंयोजिका दुर्गा जोशी, सचिव डिलेश्वरी साहू, सहसचिव रीता पाठक, कोषाध्यक्ष रुक्मणी कोसरे, सहकोषाध्यक्ष वंदना यादव, सरिता साहू, भगवती सोनकर, राजेश्वरी नेताम, सुशीला गरिया सहित अन्य सदस्यगण ससम्मान उपस्थित रहीं। सभी बहनों ने इस आत्मीय आयोजन को आत्मिक संतोष और आंतरिक आनंद का अद्वितीय अनुभव बताया।

संगठन ने संदेश दिया कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, अपितु हृदयों को जोड़ने का पावन पर्व है। हुड़दंग और फूहड़ता से परे, यदि हम इस पर्व को सेवा, सद्भाव और सहभागिता के साथ मनाएँ, तो न केवल हमारे जीवन में, बल्कि किसी और के जीवन में भी खुशियों के रंग स्थायी रूप से भर सकते हैं।

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