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तांदुला नदी का होगा पुनरूद्धार, जिला प्रशासन के अथक प्रयासों से जिले के जीवनदायिनी नदी का होगा कायाकल्प।

लीलाधर साहू

गुण्डरदेही।

जल संसाधन विभाग जिला बालोद एवं आईआईटी भिलाई के मध्य आज हुआ एमओयू

तांदुला नदी के पुनरूद्धार से नदी पुर्नजीवन से संबंधित अनेक परियोजनाओं के लिए प्रशस्त होगा मार्ग।

बालोद जिला प्रशासन के अथक प्रयासों से शीघ्र ही जिले की जीवन दायिनी तांदुला नदी का पुनरूद्धार होने से यह नदी अपने नए स्वरूप में प्रस्तुत होगा। इसके पुनरूद्धार कार्य हेतु आज जल संसाधन विभाग जिला बालोद एवं आईआईटी भिलाई के इनोवेशन एंड टेक्नोलॉजी फाउंडेशन के मध्य औपचारिक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया गया। जिला प्रशासन के विशेष पहल पर शुरू किए गए यह कार्य बालोद जिले में नदी पुर्नजीवन के लिए एक वैज्ञानिक सतत एवं सामुदायिक भागीदारी आधारित माॅडल स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई में आज संपन्न एमओयू के दौरान दुर्ग संभाग के आयुक्त सत्य नारायण राठौर, कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा, जल संसाधन विभाग के कार्यपालन अभियंता पीयूष देवांगन सहित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भिलाई के अधिकारीगण उपस्थित थे।

कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के दिशा-निर्देशन में बालोद जिला प्रशासन द्वारा शुरू किए गए इस पहल से जिले की जीवन दायिनी तांदुला नदी का शीघ्र ही कायाकल्प होने के साथ-साथ यह नदी धरती माता आम जनता की सेवा में अपनी स्वरूप में प्रस्तुत होने वाली है।

संभाग आयुक्त सत्य नारायण राठौर ने बालोद जिला प्रशासन के विशेष प्रयासों से जीवन दायिनी तांदुला नदी को सजाने, संवारने की दिशा में शुरू किए गए इस महत्वपूर्ण कार्य की भूरी-भूरी सराहना की। राठौर ने बालोद जिला प्रशासन की महत्वपूर्ण पहल को अत्यंत महत्वपूर्ण एवं समयोचित प्रयास बताया।

उन्होंने आशा व्यक्त किया कि इस परियोजना की सफलता न केवल बालोद जिले के लिए बल्कि भविष्य में समूचे छत्तीसगढ़ राज्य में नदी पुर्नजीवन से संबंधित अनेक परियोजनाओं के लिए मार्ग प्रशस्त करेगी। संभाग आयुक्त ने जिला प्रशासन बालोद एवं आईआईटी भिलाई को इस महत्वपूर्ण कार्य की सफलता के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा ने इस परियोजना के व्यापक उद्देश्यों के संबंध में एक स्पष्ट दृष्टि प्रस्तुत की।

उन्होंने वर्तमान में तांदुला नदी के समक्ष सेलेटेशन, प्रदूषण, जल प्रवाह में मौसमी अस्थिरता एवं पारिस्थितिक क्षरण जैसे मौजूद चुनौतियों के संबंध में प्रकाश डाला। इसके अलावा उन्होंने बालोद जिला प्रशासन की ओर से तांदुला जलाशय से हीरापुर एनीकट तक 03 किमी. के क्षेत्र तक के क्षेत्र को भविष्य में संतुलित स्वच्छ एवं पर्यावरणीय रूप से सुदृढ़ नदी तंत्र के रूप में विकसित करने की योजना के संबंध में जानकारी दी। इस अवसर पर आईआईटी भिलाई की टीम के द्वारा इस बहुद्देश्यी परियोजना के संबंध में विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी दिया गया।

जिसके अंतर्गत निर्धारित समयावधि में इनके क्रियान्वयन के संबंध में विस्तृत योजना एवं प्रमुख फोकस क्षेत्रों के संबंध में जानकारी भी साझा की गई। इसके अलावा वैज्ञानिक सर्वेक्षण, जल गुणवत्ता सुधार, जैव विविधता संरक्षण, जल प्रबंधन एवं सामुदायिक सहभागिता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं को भी रेखांकित किया गया। जिसका बालोद जिला प्रशासन द्वारा भूरी-भूरी सराहना की गई।

उल्लेखनीय है कि इस परियोजना के अंतर्गत तांदुला जलाशय से हीरापुर एनीकट तक 03 किमी. के चयनित क्षेत्र के महत्वपूर्ण हिस्से को एक हाइड्रोलॉजिकली स्थिर एवं पारिस्थितिक रूप से समृद्ध नदी कॉरिडोर में परिवर्तित करने की योजना शामिल है। इसमें उन्नत तकनीकी सर्वेक्षण, प्रकृति-आधारित समाधान एवं समुदाय की सक्रिय भागीदारी को समाहित किया गया है। जिससे कि आम जनता को इस योजना का दीर्घकालिक परिणाम मिल सके।

बालोद जिला प्रशासन के विशेष प्रयासों से शुरू किया गया यह पहल परियोजना अंचल के सतत विकास, पर्यावरणीय पुर्नस्थापना और जनभागीदारी के माध्यम से क्षेत्रीय विकास का एक प्रेरणादायी मॉडल बनाने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण प्रयास है। इसके माध्यम से तांदुला नदी के जल को स्वच्छ एवं निर्मल बनाने के साथ-साथ नदी के जल कंुभियों का समुचित उपयोग के अलावा इस पूरे क्षेत्र को पर्यटन क्षेत्र के रूप में भी विकसित करने का प्रयास किया जाएगा।

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