परस साहू गुण्डरदेही।
बालोद-डौंडीलोहारा-राजनांदगांव मुख्य मार्ग पर स्थित पाररास रेलवे फाटक पर लंबे समय से प्रस्तावित ओवरब्रिज निर्माण अब जमीन पर उतरने की तैयारी में है। विकास की इस बड़ी योजना के साथ एक अहम और संवेदनशील पहलू भी जुड़ा है—पेड़ों की कटाई। प्रशासन ने 188 पेड़ों की कटाई को मंजूरी दे दी है, जिसकी शुरुआत 5 मई से की जाएगी।
पाररास के गणेश मंदिर से लेकर एलआईसी कार्यालय के सामने तक फैले इन पेड़ों को हटाने का निर्णय लिया गया है, ताकि ओवरब्रिज निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा न आए। वन विभाग के एसडीओ केएल साहू ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि कटाई के एवज में 1880 पौधे लगाए जाएंगे और इसके लिए उपयुक्त जमीन की तलाश जारी है।
हालांकि पहले यह कार्रवाई 2 मई से शुरू होनी थी, लेकिन अधिकृत एजेंसी के कर्मचारियों की व्यस्तता के कारण तारीख आगे बढ़ाकर 5 मई कर दी गई है। सेतु विभाग का कहना है कि सभी आवश्यक मंजूरियां मिल चुकी हैं और अब निर्माण कार्य को गति देने में आसानी होगी।
परियोजना को लेकर विभागीय स्तर पर दावे तो तेज हैं, लेकिन अब तक भू-अर्जन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे में निर्माण कार्य कब शुरू होगा, इसकी कोई स्पष्ट समयसीमा सामने नहीं आई है। जून में मानसून की दस्तक के साथ ही काम और चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जिससे लोगों को राहत मिलने में देरी संभव है।
करीब 38.98 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इस ओवरब्रिज की लंबाई 874 मीटर चौड़ाई 13 मीटर होगी। साथ ही दोनों ओर 7-7 मीटर चौड़ी सर्विस लेन भी बनाई जाएगी। परियोजना पूरी होने पर लगभग एक लाख लोगों को आवागमन में राहत मिलने का दावा किया जा रहा है।
फिलहाल रेलवे फाटक पर ट्रेन या मालगाड़ी गुजरने के दौरान लगने वाले जाम से लोगों को रोजाना परेशानी झेलनी पड़ती है। ऐसे में यह ओवरब्रिज क्षेत्र के लिए एक बड़ी सौगात साबित हो सकता है—बशर्ते काम समय पर पूरा हो। विकास की राह में जहां एक ओर सुविधाओं का विस्तार हो रहा है, वहीं पर्यावरण संतुलन बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है—अब देखना होगा कि प्रशासन इन दोनों के बीच संतुलन कैसे स्थापित करता है।

