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बालोद: सर्व आदिवासी समाज ने मुख्यमंत्री को सौंपा 16 सूत्रीय मांगपत्र, जनजातीय अधिकारों और आरक्षण से जुड़े मुद्दों पर की कार्रवाई की मांग।

परस साहू बालोद 

बालोद। सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ द्वारा अनुसूचित जनजाति वर्ग की विभिन्न समस्याओं और अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नाम 16 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा गया है। समाज ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक आयोजित कर मांगों पर गंभीरता से विचार करने और विभागवार कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।

समाज द्वारा 16 मार्च 2026 को प्रस्तुत मांगपत्र में प्रशासन, शिक्षा, राजस्व, खनिज, सामान्य प्रशासन तथा आदिम जाति कल्याण विभाग से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषय शामिल किए गए हैं।

प्रमुख मांगें

सर्व आदिवासी समाज ने अनुसूचित क्षेत्रों में प्रशासन एवं नियंत्रण के लिए लागू पेसा एक्ट 2022 के प्रभावी क्रियान्वयन तथा अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था करने की मांग की है।

मांगपत्र में फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर शासकीय सेवाओं में नियुक्ति और पदोन्नति प्राप्त करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है। इसके अलावा आदिवासी छात्रों की छात्रवृत्ति के लिए आय सीमा की बाध्यता समाप्त कर पूर्व व्यवस्था लागू करने की मांग की गई है।

समाज ने मुख्यमंत्री द्वारा अनुसूचित जनजाति सलाहकार परिषद में समाज के प्रतिनिधि को शामिल करने की घोषणा को जल्द लागू करने की भी मांग की है।

भूमि, राजस्व और खनिज से जुड़े मुद्दे

मांगपत्र में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और प्रबंधन में प्रभावित आदिवासियों को उचित प्रतिकर और लाभ दिलाने की बात कही गई है। साथ ही छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता की धारा 165(6) एवं 170(ख) का प्रभावी पालन सुनिश्चित करने की मांग रखी गई है।

खनिज पट्टों के संबंध में समाज ने सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए अनुसूचित क्षेत्रों में खनन गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने की मांग की है। समाज का कहना है कि खनिज उत्खनन के लिए आदिवासी भूमि का अधिग्रहण करने के बजाय भूमि स्वामियों को शेयर होल्डर के रूप में लाभ दिया जाना चाहिए।

अनुसूचित क्षेत्रों के विकास पर जोर

मांगपत्र में अनुसूचित क्षेत्रों के विभिन्न विभागों में रिक्त पदों को बैकलॉग भर्ती के माध्यम से भरने, नए बनने वाले विकासखंडों को आदिवासी विकासखंड घोषित करने तथा ट्राइबल लैंड बैंक की स्थापना की मांग की गई है।

इसके अलावा बस्तर और सरगुजा संभाग के अनुसूचित क्षेत्रों में स्थानीय भर्ती पर लगी रोक हटाने, पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों के नगर पालिका एवं नगर पंचायत अध्यक्ष पदों को अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित करने और जनजातीय अधिकारियों-कर्मचारियों को समयबद्ध पदोन्नति देने की मांग भी शामिल है।

एनएमडीसी मुख्यालय और अन्य मांगें

सर्व आदिवासी समाज ने एनएमडीसी का मुख्यालय जगदलपुर स्थानांतरित करने तथा संस्था के निजीकरण पर रोक लगाने की मांग उठाई है। वहीं सामान्य प्रशासन विभाग से जुड़े विषयों में गैर अनुसूचित जनजाति व्यक्तियों द्वारा अनुसूचित जनजाति की महिलाओं से विवाह उपरांत संपत्ति संबंधी मामलों में स्पष्ट नियम बनाने की मांग भी की गई है।

सर्व आदिवासी समाज का कहना है कि अनुसूचित जनजाति वर्ग के सामाजिक, आर्थिक और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए इन मांगों पर शीघ्र निर्णय लिया जाना आवश्यक है। समाज ने सरकार से मांगपत्र में शामिल बिंदुओं पर विभागवार कार्रवाई कर ठोस पहल करने की अपेक्षा जताई है।

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