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नैनो उर्वरक के उपयोग और सरकारी योजनाओं के लाभ से चमकी ओंकार की किस्मत, खेती को बनाया मुनाफे का सौदा।

परस साहू बालोद 

परंपरागत खेती को अगर आधुनिक तकनीक और शासन की योजनाओं का साथ मिल जाए, तो किसान की तकदीर बदलते देर नहीं लगती। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखण्ड के ग्राम परसदा के प्रगतिशील किसान ओंकार साहू ने। ओंकार ने नैनो उर्वरक को अपनाकर न सिर्फ अपनी फसल का उत्पादन बढ़ाया है, बल्कि अपनी खेती को एक बेहद मुनाफेदार व्यवसाय में बदल दिया है। लगभग 5 एकड़ भूमि पर खेती करने वाले ओंकार साहू खरीफ सीजन में धान और रबी में तिवड़ा व सरसों की फसल लेते हैं। इस साल उन्होंने स्थानीय सहकारी समिति से पारंपरिक एनपीके, यूरिया और पोटाश के साथ-साथ नैनो डीएपी और नैनो यूरिया का भी उठाव किया।

कृषि विभाग के अधिकारियों के कुशल मार्गदर्शन में जब उन्होंने अपने खेतों में नैनो उर्वरकों का छिड़काव किया, तो परिणाम चैंकाने वाले थे। ओंकार बताते हैं कि नैनो उर्वरकों के इस्तेमाल से फसल की सेहत सुधरी और उत्पादन में भारी बढ़ोतरी हुई। इसका असर खेतों में साफ दिखाई देता है। मैं जिले के दूसरे किसान भाइयों से भी अपील करता हूँ कि बेहतर उत्पादन के लिए नैनो यूरिया और नैनो डीएपी को जरूर अपनाएं। वर्तमान में ओंकार साहू सिर्फ बेहतर फसल तक सीमित नहीं है। शासन की किसान-हितैषी योजनाओं ने उनके जीवन को एक नई स्थिरता दी है।

कृषक उन्नति योजना के तहत धान का बेहतर मूल्य मिलने से ओंकार को जबरदस्त आर्थिक लाभ हुआ। धान बेचकर मिले इसी मुनाफे से आज वे अपने सपनों का पक्का घर बना रहे हैं। पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली राशि का उपयोग वे समय पर खाद, बीज और खेती के दूसरे जरूरी कामों के लिए करते हैं, जिससे उन्हें कहीं से पैसे लेने की जरूरत नहीं पड़ती। अपनी इस सफलता से गदगद किसान ओंकार साहू ने प्रधानमंत्री  नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का हृदय से आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि इन किसान-हितैषी योजनाओं के जमीनी स्तर पर सही संचालन के कारण ही आज छोटे और मझोले किसानों के सपने सच हो रहे हैं।

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