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स्वच्छ ग्राम एवं स्वच्छ जलवायु’ अभियान अंतर्गत गतिविधियों का किया जा रहा निरंतर आयोजन।

परस साहू बालोद 

सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के परिपालन में एसडब्ल्यूएम नियम-2026 के क्रियान्वयन एवं जागरूकता हेतु दिव्या उमेश मिश्रा के मागदर्शन में ग्रामों में एसडब्ल्यूएम नियम-2026 के प्रचार-प्रसार हेतु डस्टबिन के माध्यम से घरों से निकलने वाले कचरे को गीला, सूखा, घरेलू खतरनाक एवं स्वच्छता अपशिष्ट के रूप में अलग-अलग करने, कचरे का स्रोत पर पृथक्करण, नियमित संग्रहण एवं प्लास्टिक का कम उपयोग करने तथा पुनर्चक्रण को बढ़ावा देंने ग्रामीणों को प्रेरित किया जा रहा है।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील चंद्रवंशी ने बताया कि अभियान के अंतर्गत ग्रामीणों को गांवों में गीले एवं सूखे कचरे का पृथक संग्रहण सुनिश्चित करने तथा प्लास्टिक अपशिष्ट के वैज्ञानिक निस्तारण के संबंध में जानकारी दी जा रही है। उन्होंने बताया कि कचरे का उचित प्रबंधन केवल स्वच्छता का विषय नहीं है, बल्कि यह पर्यावरण संरक्षण, सार्वजनिक स्वास्थ्य सुधार एवं जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने का एक प्रभावी माध्यम भी है। इसके साथ ही महिलाओं को प्लास्टिक कचरे के संग्रहण, पुनर्चक्रण एवं उससे आय सृजन की संभावनाओं के संबंध में भी मार्गदर्शन प्रदान किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि खुले में कचरा फेंकने एवं प्लास्टिक अपशिष्ट के अनियंत्रित उपयोग से पर्यावरण, जल स्रोतों तथा मानव स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इसलिए प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है कि वह कचरे का पृथक्करण कर निर्धारित स्थानों पर ही उसका निपटान करने को कहा। इससे गांवों एवं शहरों को स्वच्छ रखने के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिलेगी। उन्होंने बताया कि स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण के उद्देश्यों की प्राप्ति एवं स्वच्छ, स्वस्थ एवं टिकाऊ पर्यावरण के निर्माण के लिए जनसहभागिता अत्यंत आवश्यक है।

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