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90 साल के बुजुर्ग ने अपने पैतृक संपत्ति के 50 लाख रुपए से बनाया हॉस्पिटल।

परस साहू की ग्राउंड रिपोर्ट

लोकेशन….बालोद

एंकर….बालोद जिले के दुबचेरा में इंसानियत की बहतरीन तस्वीर सामने आई है….जहां एक 90 साल के बुजुर्ग संत ने अपने पैतृक संपत्ति से 50 लाख रुपए की लागत से अस्पताल बनाया ताकि ग्रामीणों को गांव में ही बेहतर चिकित्सा सुविधा मिल सके…..लेकिन विडंबना है कि पांच साल पहले बने अस्पताल भवन में अब तक नहीं खुल पाया है।

दरअसल गुरु सुखदास का जन्म वर्ष 1936 में दुबचेरा हुआ था….. बचपन में ही उनकी शादी पास के ही गांव ठेकवादीही की रहने वाली सोना नाम की लड़की से हो गया…. कुछ साल साथ रहने के बाद लगभग 25 साल की उम्र में वर्ष 1961 में साधु संत के साथ रहकर उन्होंने दीक्षा ग्रहण की…. फिर भी उनका मन नहीं माना तो 1964 में वह बुरहानपुर के कबीर आश्रम चले गए…. जहाँ कई सालों तक संतों की सेवा करने के बाद वह खुद संत बन गए…. पति के बुरहानपुर जाने के बाद पत्नी भी संतों की सेवा में अपना सारा जीवन लगा दिया….. वर्ष 2015 में पत्नी लकवा ग्रस्तही हो गई…. तो गुरु सुख दास वापस अपने गांव दुबचेरा वापस लौट गए…. 3 साल बाद वर्ष 2018 उनकी पत्नी का देहांत हो गया…..वर्तमान में वह दिनेद्र दास नामक संत के साथ रहते हैं।

बुरहानपुर से लौट के बाद उन्होंने लोगों की सेवा करने की ठानी…. और अपने भाई को भी इसी बात को लेकर समझाना चाहा लेकिन उनके भाई ने विपरीत जवाब दे दिया तब उन्होंने यह ठान लिया कि कुछ अच्छा करना है…. इसके बाद गुरु सुखदास ने गांव वाले लोगों से चर्चा की तब ग्रामीणों ने उन्हें गांव में अस्पताल बनाने की राय दी…. जिसके लिए ग्राम पंचायत की ओर से 25 डिसमिल की जमीन उन्हे अस्पताल बनाने के लिए दी…. फिर गुरु सुखदास ने गुरुर में मौजूद उनके नाम की जमीन को बेचा और 50 लाख रुपए की लागत से एक 10 कमरों वाली उप स्वास्थ्य केंद्र की बिल्डिंग बनावा दी…. अस्पताल बनाने से पहले उन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मुलाकात भी की थी मौखिक सहमति मिलने के बाद उन्होंने अस्पताल तैयार करवाया।

अस्पताल तैयार हुए लगभग 5 वर्ष पूरे हो चुके हैं लेकिन आज भी उसे अस्पताल के लिए सरकार की ओर से सेटअप नहीं दिया गया जिसके कारण 5 साल से अस्पताल भवन धूल खाता पड़ा है…. किसी ने उन्हें राय दी कि फर्नीचर होने के बाद अस्पताल के लिए सेटअप मिल जाएगा तो उन्होंने फिर अपने हजारों रुपए लगाकर अस्पताल में फर्नीचर की व्यवस्था की….. बावजूद इसके अस्पताल अभी तक खुला नहीं पाया।

अस्पताल को चालू करने के लिए कई बार स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ संत सुखदास मंत्री से लेकर तमाम नेताओं और अधिकारियों के दफ्तर के चक्कर काट चुके हैं…. लेकिन विडंबना है कि सभी के द्वारा आश्वासन मिलने के बावजूद अस्पताल केवल शोपीस बनकर रह गया है।

अस्पताल में हर रोज जरूरी सुविधाएं हैं जो एक अस्पताल में होना चाहिए…. वहां बाथरूम से लेकर, डॉक्टर और नर्सो के बैठने का स्थान, ऑपरेशन थिएटर, पुरुष और महिला वार्ड, प्रसव कक्ष के साथ ही बढ़िया बाथरूम भी बनाया गया है, अस्पताल में विद्युत संबंधित कार्य भी पूरे हो चुके हैं इसके अलावा टाइल्स भी लगाया गया है….वही अस्पताल में बोर भी हुआ है ताकि पानी की तंगी ना हो।

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