परस साहू बालोद
गुरुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रामीण परिवारों को अधिक रोजगार और आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 1 जुलाई 2026 से वीबी-जीरामजी (विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन-ग्रामीण) योजना लागू कर दी है। इस योजना के तहत प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के मजदूरी आधारित रोजगार की वैधानिक गारंटी दी जाएगी। यदि मांग के बावजूद समय पर रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो संबंधित परिवार को बेरोजगारी भत्ता देने का प्रावधान किया गया है। वहीं मजदूरी भुगतान में देरी होने पर प्रत्येक विलंबित दिन के लिए मुआवजा भी दिया जाएगा।
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन और जनजागरूकता के लिए प्रदेशभर में अभियान चलाया जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन, जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख और जनसेवक राकेश यादव ने संयुक्त रूप से योजना का स्वागत करते हुए इसे ग्रामीण विकास और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ऐतिहासिक पहल बताया।
प्रदेश महामंत्री यशवंत जैन ने कहा कि वीबी-जीरामजी योजना ग्रामीण परिवारों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने कहा कि रोजगार की गारंटी के साथ श्रमिकों के अधिकारों की भी रक्षा की गई है। रोजगार उपलब्ध नहीं होने पर बेरोजगारी भत्ता तथा मजदूरी भुगतान में देरी होने पर मुआवजा देने का प्रावधान श्रमिक हितों को मजबूत करेगा।
जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख ने बताया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के मार्गदर्शन में ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और जिला स्तर पर लगातार प्रशिक्षण, बैठकें तथा ग्राम सभाओं के माध्यम से ग्रामीणों को योजना की जानकारी दी जा रही है। उन्होंने कहा कि योजना के अंतर्गत विकास कार्यों का चयन ग्राम सभा के माध्यम से होगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप कार्यों को प्राथमिकता मिलेगी। इससे गांवों में रोजगार के साथ-साथ विकास कार्यों को भी नई गति मिलेगी।
जनसेवक राकेश यादव ने कहा कि योजना के तहत जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका संवर्धन और जलवायु परिवर्तन से जुड़े कार्यों को विशेष प्राथमिकता दी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मनरेगा के अंतर्गत संचालित सभी कार्य पूर्ववत जारी रहेंगे, जबकि नई योजना से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर और अधिक बढ़ेंगे तथा परिवारों की आय में वृद्धि होगी। तीनों नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि वीबी-जीरामजी योजना केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि पंचायतों को सशक्त बनाने, पारदर्शी व्यवस्था विकसित करने और ग्रामीण भारत को आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने सभी पात्र ग्रामीण परिवारों से योजना की जानकारी प्राप्त कर इसका लाभ उठाने की अपील की।
मुख्य बिंदु 1 जुलाई 2026 से पूरे प्रदेश में वीबी-जीरामजी योजना लागू।
पात्र ग्रामीण परिवारों को वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी।
रोजगार नहीं मिलने पर बेरोजगारी भत्ता।
मजदूरी भुगतान में देरी होने पर मुआवजा।
ग्राम सभा के माध्यम से विकास कार्यों का चयन।
जल संरक्षण, ग्रामीण अधोसंरचना और आजीविका संवर्धन को प्राथमिकता।
मनरेगा के सभी कार्य पूर्ववत जारी रहेंगे।

