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ईवी गार्बेज रिक्शा और लोडर वाहन से ग्रामीण महिलाएं बन रहीं आत्मनिर्भर जेम पोर्टल के माध्यम से पूरी पारदर्शिता और नियमों के तहत की गई है वाहनों की खरीदी।

परस साहू बालोद

ईंधन व्यय में बचत के साथ पर्यावरण संरक्षण और आजीविका संवर्धन में सिद्ध हो रही बहुउपयोगी।ग्रामीण क्षेत्रों में ई-वाहन (ईवी) की उपलब्धता केवल वाहन प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वच्छ भारत मिशन को मजबूत करने की एक महत्वपूर्ण पहल है। जनपद पंचायत डौंडीलोहारा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी पंकज देव ने बताया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत में दो-दो ईवी गार्बेज रिक्शा उपलब्ध होने से स्व-सहायता समूह की महिलाएं नियमित रूप से घर-घर जाकर गीला एवं सूखा कचरा अलग-अलग एकत्रित कर रही हैं। इससे गांवों में स्वच्छता व्यवस्था सुदृढ़ हुई है तथा महिलाओं को रोजगार एवं आय का माध्यम मिला है। उन्होंनेे बताया कि प्रत्येक ग्राम पंचायत को 7.60 लाख रूपये की लागत से एक ईवी गार्बेज रिक्शा एवं एक ईवी लोडर वाहन उपलब्ध कराया गया है। उन्होंने बताया कि यह पूरी खरीदी जेम पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन, पूर्णतः पारदर्शी एवं प्रतिस्पर्धात्मक प्रक्रिया अपनाते हुए न्यूनतम (एल-1) दर पर की गई है। इस प्रक्रिया में शासन के सभी नियमों एवं वित्तीय प्रावधानों का अक्षरशः पालन किया गया है।

सीईओ  पंकज देव ने बताया कि ईवी लोडर वाहन ग्राम पंचायतों के लिए बहुउपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। भवन निर्माण सामग्री, कृषि उत्पाद, घरेलू सामान, किराना सामग्री तथा अन्य आवश्यक वस्तुओं के परिवहन में इनका उपयोग किया जा रहा है। कई महिला समूह इन वाहनों के माध्यम से अतिरिक्त आजीविका के अवसर भी प्राप्त कर रहे हैं। ईवी वाहनों के संचालन में पेट्रोल एवं डीजल की आवश्यकता नहीं होती। केवल चार्जिंग से इनका संचालन संभव है, जिससे ईधन व्यय में भारी बचत हो रही है। साथ ही प्रदूषण में कमी आ रही है और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

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