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बालोद, बेमेतरा, दुर्ग, कबीरधाम एवं राजनांदगांव के न्यायिक अधिकारियों का संभाग स्तर पर कम्प्यूटर कौशल संवर्धन कार्यक्रम।

लीलाधर साहू

गुण्डरदेही।

छत्तीसगढ़ राज्य न्यायिक अकादमी, बिलासपुर के तत्वावधान में दुर्ग संभाग के समस्त न्यायिक अधिकारियों के लिए कम्प्यूटर कौशल संवर्धन कार्यक्रम का आयोजन 20 दिसम्बर को नवीन कॉन्फ्रेंस हॉल, जिला न्यायालय, दुर्ग में किया गया। कार्यक्रम में दुर्ग संभाग के अंतर्गत जिला बालोद, बेमेतरा, दुर्ग, कबीरधाम एवं राजनांदगांव के सभी न्यायिक अधिकारियों की सहभागिता रही। कार्यक्रम का उद्देश्य न्यायिक अधिकारियों की सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी दक्षताओं को सुदृढ़ करना तथा न्यायालयीन कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी, पारदर्शी एवं तकनीक सक्षम बनाना था।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातः 10.30 बजे उद्घाटन सत्र से हुआ। उद्घाटन सत्र में न्यायालयीन अभिलेखों का डिजिटलीकरण, पेपरलेस कोर्ट की अवधारणा, न्यायालयीन कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग, ई-साक्ष्य (डिजिटल साक्ष्य प्रबंधन), ई-कॉपींग, हाईकोर्ट फास्टर मेल सेवा, ई-एससीआर पर जजमेंट सर्च, सीसीटीएनएस, आईसीजेएस एवं मेरी पहचान, साथ ही सीआईएस 4.0 का अवलोकन एवं हँड्स-ऑन प्रशिक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण प्रदान की गयी।

यह सत्र मास्टर ट्रेनर प्रतीक टेम्भुरकर, व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी, रायगढ़ एवं मास्टर ट्रेनर सतप्रीत कौर छाबड़ा, व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी, बालोद (डौंडीलोहारा) द्वारा गया। कार्यक्रम में उपस्थित मुख्य अतिथियों का स्वागत पर्यावरण अनुकूल पौधे देकर किया गया। इसके अतिरिक्त मुख्य अतिथियों को जिला न्यायालय के मध्यस्थता केन्द्र दुर्ग द्वारा मध्यस्थता पर आधारित एवं प्रकाशित पुस्तक ष्सद्भाव एवं समाधान की यात्राष् की प्रति प्रदान की गयी। इसके साथ ही जिला बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम एवं राजनांदगांव से उपस्थित मुख्य अतिथियों को उनके जिले के अपराध के संबंध में केन्द्रीय जेल दुर्ग में निरूद्ध बंदियों द्वारा बनायी गयी पेंटिग्स भी भेंट स्वरूप प्रदान की गयी।

साथ ही न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा मुख्य न्यायाधिपति छग उच्च न्यायालय बिलासपुर के संदेश से प्रेरित होकर दुर्ग जिले में बच्चों की सुरक्षा के संबंध में की जा रही नवीनतम पहल बाल सुरक्षा ब्रिगेड से भी प्रतिभागियों को अवगत कराया गया। कार्यक्रम में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से टेक्नोलॉजी से संबंधित आकर्षक रंगोली बनायी गयी। इसके साथ ही उक्त कार्यक्रम में केन्द्रीय जेल दुर्ग में निरूद्ध बंदियों, पैरालीगल वालेंटियर्स तथा लीगल एड डिफेंस काउंसिल सिस्टम के कर्मचारियों द्वारा बनायी गयी पेंटिग्स की प्रदर्शनी भी रखी गयी थी।

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