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बालोद उपजेल में नशा मुक्त भारत अभियान का आयोजन।

लीलाधर साहू

गुण्डरदेही।

बालोद-प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय आत्मज्ञान भवन आमापारा बालोद के तत्वाधान में ‘‘नशा मुक्त भारत अभियान’’ के अंतर्गत एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन बालोद उपजेल में किया गया। जिसमें विशेष रूप से बी.के. सरिता दीदी, बी.के. नेहा दीदी व बी.के. भोपसिंह साहू जी उपस्थित थे।

सभा मेें संबोधित करते हुए बी.के. सरिता दीदी ने कहा कि राजयोग मेडिटेशन ब्रह्माकुमारीज संस्था द्वारा सिखाया जाने वाला एक आध्यात्मिक प्रयास है जिसमें आप इसके अभ्यास द्वारा सहज ही सब व्यसनों और अपनी बुराईयों से छुटकारा पा सकते है क्योंकि जो व्यसनों से दूर है वे ही अपने आपको मानसिक, शारीरिक, भावनात्मक एवं बौध्दिक रूप से सदाकाल के लिए स्वस्थ रख सकते है।राजयोग द्वारा हम अपने जीवन को सकारात्मक दिशा की ओर ले जा सकते है।

उन्होंने बताया कि एक गांव में दो सगे भाई रहते थे जिसमेें से एक भाई धनाढ्य संस्कारी और खुशहाल जीवन जी रहा था लेकिन दूसरा भाई गरीबी चरित्रहीन शराबी जीवन बिता रहा था। एक व्यक्ति गरीब भाई के पास जाता है और पूछता है कि भाई आप ऐसे जीवन क्यों बिता रहे हो तो वह कहता है मेरे पिताजी बहुत शराब पीते थे मारते-पीटते थे तो मैं भी पीता हूं सब मेरे पिताजी की गलती है।

दूसरे भाई से जाकर पूछता है तो वह कहता है कि मेरे पिताजी बहुत शराब पीते थे जिससे घर में अशांति रहती थी और वे इसके सेवन की वजह से जल्दी शरीर छोड़ दिये मै नहीं चाहता कि मेरा भी ऐसा हाल हो इसलिए मैने प्रण लिया कि मै कभी भी शराबी जीवन नहीं बिताऊंगा।

बी.के. नेहा दीदी ने कहा कि नशा मतलब आदत निर्भरता लत। नशा शब्द सुनते ही एक पिक्चर हमारे मन में बनता है नाली में गिरा हुआ शराब पिया हुआ आदि। शराब, बीड़ी, सिगरेट, तंबाकु का चाय का भी नशा होता है, जो हमारे दिमाग पर असर कर जाता है वह है नशा। सबसे पहले जीवन में नशा चोरी से आता है और वह नशा जब जीवन के अंदर घुस जाता है तो वह सबके सामने नशा करने लगता है।

घर में अगर कोई पिता, पति, बच्चा, भाई नशा करके आता है उससे सबसे ज्यादा दुखी पीड़ित महिलाएं होती है। नशा दलदल की तरह है जितना ज्यादा घुसता है वह फंसता जाता निकल नहीं पाता। नशा करेंट की तरह होता है जब तक जीवन को पूरी तरह बर्बाद नहीं करता तब तक छोड़ता नहीं है। नशे को नशे से काटा जाता है।

इस नशे को परमात्म संग के नशे की ओर ले जाते है तो जीवन बदल जाता है आध्यत्मिकता को अपनाने से जीवन जीने की कला आ जाती है।

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