लीलाधर साहू
गुण्डरदेही।
*बालोद :-* राष्ट्र की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना की प्रतीक गौमाता के संरक्षण और सम्मान के लिए पूरे देश में एक नई लहर शुरू हो गई है। राष्ट्रव्यापी गौ सम्मान आह्वान अभियान को गति देते हुए बालोद जिले के समर्पित गौसेवकों ने भी आगामी 27 अप्रैल को गौ सम्मान दिवस के रूप में मनाने का शंखनाद किया है। इस अभियान के तहत गौसेवकों ने आम जनता से इस पुनीत कार्य में जुड़ने की भावुक अपील की है।
*चरणबद्ध आंदोलन की रूपरेखा,तहसील से दिल्ली तक गूंजेगी आवाज* अभियान की रणनीति साझा करते हुए गौसेवकों ने बताया कि यह आंदोलन पूरी तरह योजनाबद्ध और अनुशासित होगा। इसकी शुरुआत स्थानीय स्तर से होगी जिसमें प्रथम चरण में देश के प्रत्येक तहसील कार्यालय में तहसीलदार को राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा।
द्वितीय चरण में जिला स्तर पर कलेक्टर के माध्यम से राज्य शासन तक अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से पहुंचाया जाएगा। यदि मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो गौभक्तों का यह जत्था राजधानी दिल्ली कूच करेगा, जहां आमरण अनशन के माध्यम से केंद्र सरकार का ध्यान आकर्षित किया जाएगा।
*प्रमुख मांगें :- गौमाता को मिले ‘राष्ट्रमाता’ का दर्जा*
गौसेवकों ने अपनी मांगों को स्पष्ट करते हुए केंद्र और राज्य सरकारों के समक्ष अपनी मांगें रखी है जिसमें गौमाता को राष्ट्रमाता, राष्ट्रदेव, राष्ट्र आराध्या, राष्ट्र धरोहर या राष्ट्र आधार घोषित किया जाए। गौहत्या पर पूर्णतः प्रतिबंध लगाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा कठोर राष्ट्रव्यापी कानून बनाया जाए। गौवंश के संरक्षण, संवर्धन और प्रबंधन के लिए एक स्वतंत्र गौ मंत्रालय का गठन हो। गौमाता को सेवा, सुरक्षा और सम्मान का मौलिक अधिकार प्रदान किया जाए।गोबर और गोमूत्र के औषधीय व कृषि उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कृषि विश्वविद्यालयों में विशेष अनुसंधान केंद्र स्थापित किए जाएं।गौशालाओं की आत्मनिर्भरता के लिए सुव्यवस्थित चारा प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए।
बालोद जिले के गौसेवकों का कहना है कि यह मुद्दा देश की अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और स्वास्थ्य से जुड़ा विषय है। गौमाता का सम्मान ही राष्ट्र का सम्मान है। हम चाहते हैं कि 27 अप्रैल को हर भारतीय इस अभियान का हिस्सा बने और गौवंश की रक्षा के लिए अपनी आवाज बुलंद करे।इस अभियान को मिल रहे व्यापक जनसमर्थन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिनों में गौ संरक्षण का यह मुद्दा एक बड़े राष्ट्रीय आंदोलन का रूप लेने वाला है।

