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जिले के कृषकों को वैज्ञानिक अनुशंसा के आधार पर किया जा रहा है खाद का वितरण।

परस साहू बलोद 

कृषि विभाग के उप सचांलक आशीष चंद्राकर ने बताया कि खरीफ वर्ष 2026 में जिले के प्रत्येक किसानों को खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय, रायपुर द्वारा उर्वरकों की अलग-अलग 09 समूहों की अनुशंसा की गई है। जिसके द्वारा कृषक धान की खेती में आवश्यक पोषक तत्वों की पूर्ति कर सकते हैं। अनुशंसित उर्वरक समूहों की जानकारी जिले के उर्वरक विक्रय केन्द्रों में चस्पा किया गया है, जिसे जिले के कृषक अवलोकन कर अपनी आवश्यकता के अनुरूप उर्वरक समूह का चुनाव कर उर्वरक क्रय कर सकते हैं। जिले में उर्वरकों की कालाबाजारी रोकने के लिए खाद का विक्रय पी.ओ.एस. मशीन के माध्यम से अनिवार्य किया गया है तथा उर्वरक विक्रय केन्द्रों का उर्वरक निरीक्षकों के माध्यम से निरीक्षण कराकर पी.ओ.एस. स्कंध एवं भौतिक स्कंध का मिलान सुनिश्चित कराया जा रहा है।

निजी उर्वरक विक्रेताओं को भी सक्त निर्देश दिया गया है कि उर्वरकों का विक्रय पी.ओ.एस. मशीन के माध्यम से निर्धारित दर पर करें एवं क्रेता किसानों का रजिस्टर में आवश्यक जानकारी इंद्राज करें। उन्होंने बताया कि कृषकों को खाद का विक्रय कृषकों की जोत का रकबा के आधार पर किया जा रहा है। यदि किसी विक्रेता द्वारा उर्वरक भण्डारण एवं वितरण में अनियमितता बरती जाती है, तो उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 में निहीत प्रावधानों के तहत कड़ी कार्यवाही की जायेगी। अब तक जिले के कृषकों को सहकारी एवं निजी विक्रय केन्द्रों के माध्यम से 2693 मी. टन खाद का विक्रय किया जा चुका है। जिले में किसी भी प्रकार से खाद की कमी नहीं है, किसान अपनी आवश्यकता के अनुरूप जोत रकबा के आधार पर उर्वरक विक्रय केन्द्रों से उर्वरक क्रय कर सकते हैं।

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