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“बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य उनके समग्र विकास, शैक्षणिक सफलता और सामाजिक संबंधों की नीव है”

परस साहू बालोद

रायपुर:- छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व पीठासीन सदस्य सोनल गुप्ता ने कहा कि प्रत्येक बढ़ते हुए बच्चे चाहे वह किसी भी घर ,किसी भी वर्ग के हो उनके सर्वांगीण विकास के लिए मानसिक स्वास्थ्य का उत्तम रहना अति आवश्यक है! शारीरिक स्वास्थ्य की तरह मानसिक स्वास्थ्य भी उतना ही महत्वपूर्ण है, आज के दौर पर बढ़ते हुए शैक्षणिक दबाव, अत्यधिक स्क्रीन टाइम, और पारिवारिक तनाव जैसी चुनौतियां आज बच्चों को प्रभावित कर रही है.

**मानसिक स्वास्थ्य क्यों जरूरी है**
(i) एक अच्छा मानसिक स्वास्थ्य बच्चों को अपनी भावनाओं को समझने तनाव से निपटने और सकारात्मक निर्णय लेने में मदद करता है.
(ii) इसके अभाव में बच्चों के अंदर चिड़चिड़ापन ध्यान की कमी या आत्मविश्वास कमजोर होने का शिकार होते हैं.
(iii) सोशल मीडिया के जमाने में बच्चों के विचारों में तेजी से परिवर्तन हो रहा है जिससे उनके मुख्य धारा से भटकने की भी संभावना बनी रहती है.
*बच्चों मानसिक समस्याओं के प्रमुख लक्षण*
(i) अचानक बदलाव– बिना कारण उदास रहना या बहुत जल्दी गुस्सा आना.
(ii) व्यवहार में बदलाव– परिवार और दोस्तों से दूर रहने लगना या गतिविधियों में रुचि काम लेना.
(iii) शारीरिक शिकायत– लगातार सिर दर्द या पेट दर्द की बात कहना.
(iv) पढ़ाई में कमी– स्कूल में ध्यान केंद्रित न कर पाना और ग्रेड में गिरावट.
** माता-पिता की भूमिका और समाधान**
(1)बातचीत को बढ़ावा दे– बच्चों के साथ मजबूत व स्नेह पूर्ण संबंध बनाएं. उन्हें बिना किसी डर के अपनी भावनाओं साझा करने में प्रोत्साहित करें.
(2) तुलना ना करें– हर बच्चा अद्वितीय होता है उनकी तुलना कभी किसी अन्य बच्चों से करने से बचे. क्योंकि यह हीन भावना पैदा कर सकता है!

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