परस साहू बालोद
बालोद। जिले के गुंडरदेही विकासखंड मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर ग्राम फूंडा में पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि धान संग्रहण केंद्र के पीछे तांदुला मुख्य नहर से लगी एक निजी भूमि पर खड़े करीब 50 वर्ष पुराने पांच महुआ के पेड़ों को लकड़ी माफियाओं एवं आरा मिल संचालकों ने दिनदहाड़े आधुनिक आरा मशीन से काटकर ले गए।
ग्रामीणों के अनुसार, 9 जुलाई को सुबह करीब 11 बजे पेड़ों की कटाई शुरू हुई, जो दोपहर लगभग 3 बजे तक लगातार चलती रही। इस दौरान आधुनिक आरा मशीन की मदद से पांचों भारी-भरकम महुआ के पेड़ों को काटकर मौके से ले जाया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरी कार्रवाई खुलेआम हुई, लेकिन किसी भी जिम्मेदार विभाग ने समय रहते हस्तक्षेप नहीं किया।
ग्रामीणों का आरोप है कि राजस्व विभाग, वन विभाग और पुलिस प्रशासन की आंखों के सामने इतनी बड़ी घटना हो गई, लेकिन किसी प्रकार की कार्रवाई नहीं हुई। इससे क्षेत्र में प्रशासन की कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
एक ओर जिला प्रशासन पर्यावरण संरक्षण और वृक्षारोपण अभियान को बढ़ावा देने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर वर्षों पुराने महुआ जैसे महत्वपूर्ण पेड़ों की कथित अवैध कटाई से पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है। लोगों का कहना है कि जब शासन एक पेड़ काटने के बदले कई पौधे लगाने की बात करता है, तब इस तरह की घटनाएं सरकारी प्रयासों पर सवाल खड़े करती हैं।
ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि वन विभाग, राजस्व विभाग और पुलिस प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं और जिम्मेदार लोगों पर कब कार्रवाई होती है।

