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छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज ने मुख्यमंत्री को सौंपा 16 सूत्रीय मांग पत्र; पूर्व विधायक राजेंद्र राय और पदाधिकारीगण रहे मौजूद।

लीलाधर साहू

गुण्डरदेही।

छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अनुसूचित जनजाति वर्ग की विभिन्न समस्याओं और मांगों को लेकर एक विस्तृत आवेदन सौंपा। इस प्रतिनिधिमंडल में गुंडरदेही के पूर्व विधायक राजेंद्र राय, समाज के अध्यक्ष शिशुपाल सोरी एवं गोंडवाना समाज के अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी शामिल रहे।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि 26 फरवरी 2026 को हुई चर्चा के अनुसार, मुख्य सचिव की अध्यक्षता में इन विषयों पर ठोस विचार-विमर्श किया जाना आवश्यक है।

प्रमुख मांगें और चर्चा के विषय:
प्रतिनिधिमंडल ने 16 बिंदुओं पर सरकार का ध्यान आकर्षित किया, जिनमें मुख्य रूप से निम्नलिखित शामिल हैं: पेसा एक्ट (PESA Act): अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासियों के हितों के अनुरूप पेसा नियम 2022 का जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने हेतु अधिकारियों को प्रशिक्षित करने की मांग।

फर्जी जाति प्रमाण पत्र: फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर सरकारी सेवा में आए लोगों के विरुद्ध तत्काल कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह।

शिक्षा और छात्रवृत्ति: आदिवासी छात्रों के लिए छात्रवृत्ति हेतु आय सीमा का बंधन समाप्त करने और 1976 के पूर्व के प्रावधानों को लागू करने की मांग।

आरक्षण और पदोन्नति: नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के अध्यक्ष पदों को पेसा एक्ट के तहत आरक्षित करने तथा बैकलॉग पदों को तत्काल भरने की मांग।

जमीन और राजस्व: भू-राजस्व अधिनियम की धारा 165(6) और 170(ख) का सही परिपेक्ष्य में पालन करने और ‘ट्राइबल लैंड बैंक’ की स्थापना करने का सुझाव। NMDC मुख्यालय: NMDC का मुख्यालय हैदराबाद से हटाकर जगदलपुर स्थानांतरित करने और नगरनार इस्पात संयंत्र के निजीकरण को रोकने पर जोर दिया गया।

विवाह उपरांत संपत्ति का अधिकार समाज ने एक महत्वपूर्ण बिंदु उठाते हुए मांग की है कि यदि गैर-अनुसूचित जनजाति का व्यक्ति किसी अनुसूचित जनजाति की महिला से विवाह करता है, तो अर्जित संपत्ति पर पति के स्थान पर महिला के पिता का नाम दर्ज किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को ध्यानपूर्वक सुना और संबंधित विभागों (आदिम जाति कल्याण, राजस्व, खनिज और सामान्य प्रशासन विभाग) को इन विषयों पर आवश्यक कार्रवाई हेतु निर्देशित करने का आश्वासन दिया है। इस दौरान समाज के पदाधिकारियों ने “संवैधानिक रक्षा के लिए संकल्पित” होने की बात दोहराई।

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