लीलाधर साहू
गुण्डरदेही।
बालोद। अगर हौसला बुलंद हो तो बड़े से बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है, बस लगन और साहस की दरकार रहती है। कुछ इसी तरह की कहानी बालोद जिले के सिवनी गांव के रहने वाले कमलेश निषाद की। जो असहाय लोगों के लिए पिछले 14 सालों से मदद कर रहे हैं। दिव्यांग कमलेश के इस कार्य के लिए बालोद पुलिस की ओर उन्हें सम्मानित किया गया।
दिव्यांग कमलेश निषाद बालोद जिला मुख्यालय से लगे सिवनी गांव के रहने वाले हैं। वह शुरूआत से ही खेल के प्रति रूचि रखते हैं। कमलेश बताते हैं कि वर्ष 2001 में जब वह तीसरी कक्षा में थे तब स्कूली खेल में उन्होंने हिस्सा लिया था और जब वह लंबी कूद खेल रहे थे तब उनका बांया हाथ टूट गया। जिसके चलते उसका हाथ काटना पड़ा।
हाथ न होने के बावजूद नहीं मानी हार
कमलेश का एक हाथ नहीं होने के बावजूद उसने हार नहीं मानी और उन्होंने अपने जिन्दगी में दिव्यांगता को कभी आड़े आने नहीं दिया और वह मेहनत कर आगे बढ़ते रहे। कमलेश बताते हैं कि जब से उनके सिर पर परिवार की जिम्मेदारी आई तब से वह मजदूरी कर रहे हैं इसके अलावा दिव्यांगों के लिए आयोजित होने वाले क्रिकेट, गोलाफेक, लंबी कूद, भाला फेक जैसे कई खेलों में राज्य से लेकर राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर की स्पर्धा में शामिल हो कर कई पदक भी हासिल कर चुके हैं।
एक हादसे ने मदद करने की जगाई सोंच
कमलेश निषाद बताते हैं कि उन्होंने वर्ष 2012 में पिकअप गाड़ी खरीदी और उसे चलाकर अपने परिवार का गुजारा कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि जब वह गाड़ी चलाते हुए तरौद गांव से गुजर रहे थे तब देखा कि वहां पुलिस की भीड़ लगी हुई है। जिसे देखकर वह जब रूका तो देखा कि एक अकेली महिला का बलात्कार कर बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। जिसका लाश पुराना होने के कारण सड़ चुका था और उसमें कीड़े लग गये थे। इसी कारण उस लाश को कोई उठाने को तैयार नहीं था। लेकिन कमलेश पुलिस की मदद करने के लिए आगे आये और शरीर में दौना का पत्ता लगाकर महिला की लाश को अपने गाड़ी में भरकर पोष्टमार्टम घर ले गया। जहां पोस्टमार्टम होने के बाद उसने ही अंतिम संस्कार किया।
कोरोना काल में कई लोगों का सहारा बना कमलेश
तरौद में हुए घटना के बाद कमलेश निषाद ने ठान लिया कि वह इसी तरह हमेशा असहाय लोगों की मदद करेंगे। तब से लेकर बालोद जिले के विभिन्न इलाकों में होने वाले सड़क हादसे में घायल लोगों को अस्पताल तक पहुंचाने का काम कर रहे हैं। इसके अलावा अगर सड़क हादसे या किसी अन्य तरह से लोगों की मौत हो जाती है तो वह निशुल्क अपनी गाड़ी में लाश को पोस्टमार्टम घर तक ले जाकर पुलिस की मदद करते हैं। वहीं कोरोना काल में भी कमलेश ने प्रशासन की मदद करते हुए कई कोरोना मरीजों की लाश को अपनी गाड़ी से मुक्तिधाम ले जाकर अंतिम संस्कार किया है।
गांव में मौत हो जाने पर करते हैं सहयोग
कमलेश ने बताया कि उनके मोहल्ले में रहने वाले अधिकांश परिवार गरीब वर्ग के हैं। जिसके चलते अगर किसी के घर में मौत हो जाती है तो दाह संस्कार से लेकर कार्यक्रम में पहुंचे मेहमानों को भोजन कराने के लिए पैसे नहीं होते। जिसे देखते हुए उन्होंने उसकी मदद करने की ठानी और लगभग पांच सालों से अगर उसके घर में किसी सदस्य की मौत हो जाती है तो मोहल्लेवासियों से आग्रह कर युवाओं के माध्यम से राशि उस शोककुल परिवार तक पहुंचाकर मृतक के परिवार की मदद करते हैं। दिव्यांग कमलेश के इसी प्रयासों को देखकर बालोद जिला उप पुलिस अधीक्षक बोनिफास एक्का ने उन्हें प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया।

