लीलाधर साहू
गुण्डरदेही।
ग्रीष्म ऋतु के दौरान नव-रोपित पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए बालोद जिला प्रशासन ने एक बेहद सराहनीय और पारंपरिक तकनीक को अपनाया है। अपर कलेक्टर श्री चंद्रकांत कौशिक ने बताया कि संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में 2600 एवं अन्य क्षेत्रों में 1200 सहित कुल 3800 पौधों को सूखने से बचाने के लिए अब मिट्टी के घड़ों (मटकों) का उपयोग किया जा रहा है। जिला प्रशासन की इस पहल के तहत प्रत्येक पौधे के पास जमीन में एक मिट्टी का घड़ा दबाया गया है।
इस तकनीक के माध्यम से घड़े के सूक्ष्म छिद्रों से पानी धीरे-धीरे रिसकर सीधे पौधों की जड़ों तक पहुँचता है। इससे तेज धूप में भी जमीन के अंदर नमी बरकरार रहती है और पानी का वाष्पीकरण कम होता है। इसके साथ ही सीधे पाइप या बाल्टी से पानी देने की तुलना में इस विधि में पानी की बर्बादी भी बहुत कम होती है। जिला प्रशासन का उद्देश्य न केवल वृक्षारोपण करना है, बल्कि लगाए गए पौधों का संरक्षण सुनिश्चित करना भी है।

