परस साहू बालोद
गुंडरदेही में पेड़ कटाई और अवैध प्लॉटिंग पर उठे बड़े सवाल, एसडीएम अनुमति पर भी घिरी कार्रवाई
गुंडरदेही ब्लॉक मुख्यालय में इन दिनों पर्यावरण और भूमि उपयोग को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां एक ओर 100 साल पुराने प्रतिबंधित अर्जुन वृक्ष की कटाई को लेकर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कृषि भूमि पर अवैध प्लॉटिंग की गतिविधियां भी चर्चा में हैं।
प्रतिबंधित अर्जुन वृक्ष की कटाई पर विवाद
राजस्व और वन विभाग कार्यालय से महज 500 मीटर दूरी पर स्थित मुख्य मार्ग किनारे 100 साल पुराने अर्जुन वृक्ष की कटाई के लिए एसडीएम कार्यालय से अनुमति दिए जाने का मामला सामने आया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, लगभग 2 एकड़ जमीन पर 3 फीट तक मिट्टी समतलीकरण का कार्य चल रहा है, जिससे यह आशंका जताई जा रही है कि यहां किसी बड़े प्रोजेक्ट या प्लॉटिंग की तैयारी हो रही है।
इस पूरे मामले को लेकर लोगों में नाराजगी है। उनका कहना है कि जहां ग्रामीण क्षेत्रों में पेड़ काटने के लिए किसानों को लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है, वहीं शहर में ऑक्सीजन देने वाले पेड़ों की कटाई को अनुमति मिलना कई सवाल खड़े करता है।सोशल मीडिया पर भी इसे “एक पेड़ मां के नाम” अभियान के अपमान के रूप में देखा जा रहा है।इस संबंध में तहसीलदार कोमल कुमार ध्रुव ने बताया कि पेड़ कटाई की अनुमति एसडीएम कार्यालय से ली गई है।गुंडरदेही में कृषि भूमि पर काली मिट्टी डालकर और मुरूम की सड़क बनाकर बिना रेरा नियमों के प्लॉटिंग किए जाने का आरोप भी सामने आया है।* कृषि भूमि को बिना वैधानिक प्रक्रिया के प्लॉटिंग में बदला जा रहा है
* रेरा नियमों की अनदेखी करते हुए सड़कें बनाई जा रही हैं
* सड़क किनारे पेड़ काटकर जमीन समतल की जा रही है
यह भी आशंका जताई जा रही है कि भविष्य में इन जमीनों को छोटे-छोटे प्लॉट में विभाजित कर बिक्री की जा सकती है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि:
* पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए
* पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी जाए
* अवैध प्लॉटिंग और पेड़ कटाई पर तत्काल कार्रवाई हो
लोगों का कहना है कि यदि समय रहते रोक नहीं लगी, तो क्षेत्र में कृषि भूमि का बड़े पैमाने पर व्यावसायिक उपयोग बढ़ सकता है, जिससे पर्यावरण और किसानों दोनों को नुकसान होगा।
गुंडरदेही में पेड़ कटाई और अवैध प्लॉटिंग से जुड़ा यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता, पर्यावरण संरक्षण और भूमि उपयोग नियमों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस पर क्या ठोस कदम उठाता है।

