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अवैध प्लाटिंग के बाद अब अवैध रेत परिवहन का मामला गरमाने लगा है। सूत्रों के मुताबिक जल्द ही सत्ता पक्ष के एक भाजपा नेता द्वारा भी शिकायत की जा सकती है।

परस साहू की चुभती कलम से

गुंडरदेही में रेत माफियाओं का आतंक, प्रशासन मौन

गुंडरदेही, बालोद।

गुंडरदेही ब्लॉक के आधा दर्जन से अधिक गांवों में तांदुला नदी से अवैध रेत उत्खनन, परिवहन और भंडारण का खेल खुलेआम जारी है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदार अधिकारी मुख्यालय में कम और बाहर ज्यादा रहते हैं, जिसका फायदा उठाकर रेत माफिया रात के अंधेरे में नदी का सीना चीर रहे हैं।

बताया जा रहा है कि रात 11 बजे से सुबह 5 बजे तक ट्रैक्टरों के जरिए लगातार रेत निकासी की जा रही है। क्षेत्र के कई गांवों में रेत का अवैध कारोबार अब संगठित नेटवर्क के रूप में फैल चुका है।

इन गांवों में चल रहा अवैध उत्खनन

रंगकटेरा, खुटेरी, सिकोसा, खेरूद, कोदेवा, धनगांव, देवरी (ख), हीरागुड़ा सहित तांदुला नदी किनारे बसे कई गांवों में अवैध घाट संचालित होने की चर्चा है। ग्रामीणों के अनुसार रात होते ही ट्रैक्टरों की आवाजाही शुरू हो जाती है।

यहां किया जा रहा रेत का भंडारण

सिकोसा, रिंगा कटेरा, लिमोरा, हीरागुड़ा और बघमरा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर रेत डंप कर भंडारण किए जाने की जानकारी सामने आ रही है।

प्रशासन पर मिलीभगत के आरोप

ग्रामीणों का आरोप है कि कार्रवाई से पहले ही माफियाओं तक सूचना पहुंच जाती है, जिससे मौके पर पहुंचने से पहले वाहन और मशीनें गायब हो जाती हैं। क्षेत्र में खनिज, राजस्व और पुलिस विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

नदी और पर्यावरण पर संकट

स्थानीय लोगों का कहना है कि कई जगहों पर रात में जेसीबी जैसी भारी मशीनों से भी खुदाई की जाती है, जिससे नदी का प्राकृतिक स्वरूप बिगड़ रहा है। जलस्तर प्रभावित होने के साथ जलीय जीव-जंतुओं पर भी खतरा बढ़ता जा रहा है।

“मैं तीन जिलों की प्यास बुझाती हूं, मुझे बचा लो…”
तांदुला नदी की यह मूक पुकार अब भी अनसुनी बनी हुई है।

राजनीतिक संरक्षण की चर्चा

कुछ स्थानों पर ग्राम विकास समिति की आड़ में तो कुछ जगह जनप्रतिनिधियों के संरक्षण में रेत उत्खनन होने की चर्चा है। सूत्रों की मानें तो इस कारोबार में आपराधिक प्रवृत्ति के लोग भी सक्रिय हैं, जिसके चलते कई अधिकारी खुलकर कार्रवाई करने से बचते नजर आते हैं।

सांसद की नाराजगी भी बेअसर!

सुशासन के दावों के बीच सांसद Bhojraj Nag की नाराजगी की चर्चा होने के बावजूद जमीनी स्तर पर हालात जस के तस बने हुए हैं।

सबसे बड़ा सवाल…

जब क्षेत्र में स्वीकृत घाटों से निकासी बेहद कम है और प्रधानमंत्री आवास निर्माण भी सीमित स्तर पर चल रहा है, तब आखिर हजारों घनमीटर रेत कहां खप रही है?

ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाले दिनों में बड़ा जनआंदोलन देखने को मिल सकता है।

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