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पद्म विभूषण डॉ. तीजन बाई की स्मृति में डी-मैक द्वारा भावपूर्ण श्रद्धांजलि सभा आयोजित।

परस साहू बालोद

दल्लीराजहरा, 12 जुलाई। दल्लीराजहरा मॉडर्न आर्ट क्लब (D-MAC) द्वारा विश्वविख्यात पंडवानी गायिका, पद्म विभूषण, पद्म भूषण एवं पद्मश्री से सम्मानित डॉ. तीजन बाई की पुण्य स्मृति में “एक शाम तीजन बाई जी के नाम” शीर्षक से भावपूर्ण स्वरांजलि एवं श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना, दीप प्रज्ज्वलन तथा डॉ. तीजन बाई के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर किया गया। इसके पश्चात छत्तीसगढ़ के राज्यगीत “अरपा पैरी के धार…” के सामूहिक गायन से पूरे वातावरण को छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक भावना से ओत-प्रोत कर दिया गया।

इस अवसर पर महेश जायसवाल ने डॉ. तीजन बाई के संघर्षपूर्ण जीवन, पंडवानी कला में उनके अतुलनीय योगदान तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वे कापालिक शैली में पंडवानी प्रस्तुत करने वाली पहली महिला थीं। उन्होंने तीजन बाई से जुड़े कई प्रेरणादायक प्रसंग भी साझा किए, जिन्हें उपस्थित जनों ने अत्यंत भावुक होकर सुना।

श्रद्धांजलि सभा में दल्लीराजहरा एवं आसपास के क्षेत्रों से संगीत, साहित्य और कला जगत से जुड़े अनेक कलाकारों ने भाग लिया। कार्यक्रम में पंडवानी, छत्तीसगढ़ी लोकगीत, भजन, ग़ज़ल, हिंदी गीत, कविता तथा तीजन बाई के जीवन पर आधारित प्रेरक प्रस्तुतियों के माध्यम से उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। कई प्रस्तुतियों के दौरान उपस्थित कलाकार एवं दर्शक भावुक हो उठे और पूरा सभागार श्रद्धा एवं सम्मान से भर गया।

यमन संगीत विद्यालय के विद्यार्थियों ने तबला, हारमोनियम एवं गायन की मनमोहक प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। इस अवसर पर बाबू अंकल ने कलाकारों और बच्चों की प्रतिभा की सराहना करते हुए कहा कि दल्लीराजहरा जैसे छोटे शहर में अपार प्रतिभाएँ हैं। उचित मंच और मार्गदर्शन मिलने पर ये बच्चे राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकते हैं। उन्होंने कलाकारों, गुरुओं एवं बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए गमछा एवं बच्चों को कैप भेंट कर सम्मानित किया।

कार्यक्रम की विशेष प्रस्तुति सरस्वती साहू की रही। उन्होंने डॉ. तीजन बाई की शैली में पंडवानी प्रस्तुत कर ऐसा वातावरण निर्मित किया कि कुछ क्षणों के लिए ऐसा महसूस हुआ मानो स्वयं तीजन बाई मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन कर रही हों। उनकी प्रस्तुति को दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ सराहा।

डी-मैक के संचालक विजय बोरकर ने कहा कि यह आयोजन केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि डॉ. तीजन बाई की कला, संघर्ष, संस्कृति और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का एक विनम्र प्रयास है। उन्होंने कार्यक्रम को सफल बनाने वाले सभी कलाकारों, संगीतज्ञों, गुरुओं, विद्यार्थियों, अतिथियों एवं नागरिकों के प्रति आभार व्यक्त किया।

कार्यक्रम में हेमंत साहू, डी.एल. विश्वकर्मा (करहीभदर), चंचल गजबिये, लेखराज (तबला वादक), गौरव (तबला वादक), नीलांजन (तबला वादक), अचिंत कर, आराध्या, सरस्वती साहू, वीणा साहू, बाबू अंकल, लीना आंटी, स्टेला वेलिनकन, के.एल. चोपड़े, जी.के. पनिकर, ज्योति, मालती, मधुमिता, गीता भारद्वाज, किरण पाटले, सोहन साहू, महेश जायसवाल, रफीक, पत्रकार शेखर गुप्ता, जीवनलाल साहू सहित बड़ी संख्या में कलाकार, संगीत प्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का सफल संचालन मिलन मरई ने किया। अंत में सभी उपस्थितजनों ने डॉ. तीजन बाई को श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए उनकी अमर सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

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