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मेडकी में रासलीला अनुपम झांकी के साथ,,, श्री कृष्णा और रुक्मणी के विवाह पर झूम उठे श्रद्धालु,,,

परस साहू

गुण्डरदेही।

गुण्डरदेही बालोद। महिला मंडल व समस्त ग्रामवासी मेढ़की के तत्वाधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के पांचवे दिन शुक्रवार को श्रीमद भागवत कथा सुनने के लिए पहुंची श्रद्धालुओं की भीड़ से कथा स्थल खचाखच भरी रही। भागवत कथा के पांचवें दिन दही लूट व रासलीला की अनुपम झांकी प्रस्तुत की गई। मनमोहक झांकियों और लीला से श्रद्धालु उत्साहित रहे। कथा के दौरान श्रीकृष्ण की झांकी के उपरांत 56 प्रकार के व्यंजन का भोग लगाया गया और प्रसादी का वितरण किया गया।

श्रीकृष्ण और रूक्मणि के विवाह की झांकी ने श्रद्धालुओं को कर दिया भावविभोर

इसके बाद कथावाचक पंडित लोकेश शर्मा ने श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह प्रसंग सुनाया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण-रुक्मणी विवाह को एकाग्रता से सुना। श्रीकृष्ण-रुक्मणि का वेश धारण किए बाल कलाकारों कृष्ण बने भूमि हिरवानी और रुक्मणि पूर्वा हिरवानी बने हुए थे। श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। श्रद्धालुओं ने विवाह के मंगल गीत गाए। भगवान श्रीकृष्ण की दिव्य लीला और महारास के वर्णन से सुमधुरित कथा श्रवण से सभी भावविभोर हो उठे। कथा व्यास पंडित लोकेश शर्मा ने बताया कि श्रीकृष्ण लीलामृत के महारास में जीवात्मा का परमात्मा से मिलन हुआ।

 

उन्होंने कहा कि जीव और परमात्मा तत्व ब्रह्म के मिलन को ही महारास कहते है।कथा व्यास ने कहा जब जीव में अभिमान आता है तब भगवान से वह दूर हो जाता है, लेकिन जब कोई भगवान के अनुराग के विरह में होता है तो श्रीकृष्ण उस पर अनुग्रह करते है, उसे दर्शन देते है। भगवान श्रीकृष्ण रूक्मिणी के विवाह प्रसंग को सुनाते हुए उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण का प्रथम विवाह विदर्भ देश के राजा की पुत्री रुक्मणि के साथ संपन्न हुआ, लेकिन रुक्मणि को श्रीकृष्ण द्वारा हरण कर विवाह किया गया। कथा व्यास ने बताया कि रुक्मिणी स्वयं साक्षात लक्ष्मी हैं और वह नारायण से दूर रह ही नही सकती। इस अवसर पर श्रीकृष्ण और रूक्मणि के विवाह की झांकी ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया।

गोवर्धन पर्वत की कथा सुनाई

पंडित लोकेश शर्मा ने प्रसंग में बताया गया कि इंद्र को अपनी सत्ता और शक्ति पर घमंड हो गया था। उसका गर्व दूर करने के लिए भगवान ने ब्रज मंडल में इंद्र की पूजा बंद कर गोवर्धन की पूजा शुरू करा दी। इससे गुस्साए इंद्र ने ब्रज मंडल पर भारी बरसात कराई। प्रलय से लोगों को बचाने के लिए भगवान ने कनिष्ठा उंगली पर गोवर्धन पर्वत को उठा लिया। सात दिनों के बाद इंद्र को अपनी भूल का एहसास हुआ। उन्होंने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण ने पृथ्वी पर धर्म और सत्य की पुन: स्थापना के लिए द्वापर युग में अवतार लिया।

कालीय नाग का वध करके यमुना जी को पवित्र

पंडित ने कहा कि श्रीकृष्ण ने बाल्य अवस्था में ही कालीय नाग का वध करके यमुना जी को पवित्र किया, पूतना एवं बकासुर आदि मायावी शक्तियों का अंत किया। बृज भूमि में आतंक के पर्यायी कंस मामा का वध करके अपने माता-पिता देवकी-वसुदेव और नाना महाराज उग्रसेन को कारागार से मुक्त कराया। उन्होंने बताया कि गोवर्धन पूजा में प्रकृति की पूजा का उल्लेख किया गया। गायकों द्वारा सुनाए गए भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे।

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