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बालोद के दुधली में ‘मिनी भारत’ का संगम: प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी का भव्य समापन।

लीलाधर साहू

गुण्डरदेही।

छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के ग्राम दुधली में आयोजित 5 दिवसीय प्रथम राष्ट्रीय रोवर रेंजर जंबूरी का आज हर्षोल्लास के साथ समापन हुआ। 09 जनवरी से 13 जनवरी तक चले इस महाकुंभ में देश के कोने-कोने से आए युवाओं ने ‘विविधता में एकता’ का अनूठा उदाहरण पेश किया।

*अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति*
कार्यक्रम के अंतिम दिवस के समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव एवं शिक्षा मंत्री आदरणीय गजेंद्र यादव उपस्थित रहे। उनके साथ जिला भाजपा अध्यक्ष चेमन देशमुख, भारत स्काउट गाइड के मुख्य आयुक्त राकेश यादव, नगर पंचायत गुंडरदेही के अध्यक्ष प्रमोद जैन सहित अभिषेक शुक्ला, अश्विनी यादव, शहीद खान, तोरण साहू एवं अन्य जनप्रतिनिधियों ने अपनी उपस्थिति से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

*विविधता में एकता का जीवंत दर्शन*
जंबूरी के दौरान दुधली का मैदान एक छोटे भारत के रूप में नजर आया। कश्मीर से कन्याकुमारी और गुजरात से अरुणाचल प्रदेश तक के रोवर-रेंजर्स ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोक नृत्य और कला के माध्यम से सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया। कैंप में हर दिन अलग-अलग राज्यों की झलक देखने को मिली, जहाँ भाषा और खान-पान अलग होने के बावजूद सभी का संकल्प एक था— “राष्ट्र सेवा”।

*क्यों आयोजित होती है रोवर रेंजर जंबूरी?*
रोवर रेंजर जंबूरी केवल एक शिविर नहीं, बल्कि युवाओं के सर्वांगीण विकास की एक पाठशाला है। इसके मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित हैं:
* अनुशासन और नेतृत्व: युवाओं में टीम वर्क और नेतृत्व क्षमता का विकास करना।
* सांस्कृतिक विनिमय: देश के विभिन्न राज्यों की संस्कृति और परंपराओं को समझने का अवसर देना।
* सेवा की भावना: “तैयार” (Be Prepared) के आदर्श वाक्य के साथ समाज सेवा और आपातकालीन स्थिति में मदद के लिए तैयार करना।
* साहसिक गतिविधियाँ: शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विभिन्न साहसिक खेलों और गतिविधियों का आयोजन।

प्रतिदिन के विशेष कार्यक्रम
इन पांच दिनों में प्रतिदिन विभिन्न प्रतियोगिताओं और कार्यक्रमों का आयोजन हुआ, जिसमें मुख्य रूप से:
* कैंप फायर: रात के समय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ आपसी भाईचारे का जश्न।
* एडवेंचर एक्टिविटीज: रॉक क्लाइंबिंग, बाधा दौड़ और दिशा ज्ञान जैसे कठिन अभ्यास।
* स्किल डेवलपमेंट: गांठ बांधना, प्राथमिक चिकित्सा और बिना बर्तनों के खाना बनाने जैसी कलाओं का प्रदर्शन।
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने संबोधन में कहा कि “ऐसे आयोजनों से युवाओं में राष्ट्रभक्ति और अनुशासन की भावना प्रबल होती है। बालोद की धरती पर देश भर के युवाओं का यह संगम छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है।”

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