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मेढ़की के लिए गर्व का क्षण ,,,, किसान का बेटा खिलेश्वर साहू ने सीमा सुरक्षा बल बीएसएफ की एक वर्ष की कठिन प्रशिक्षण प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी कर अपने गृह ग्राम लौटे।

लीलाधर साहू

गुण्डरदेही।

बालोद जिला मुख्यालय से 3 किलोमीटर दूर ग्राम मड़की में पूरे गांव में खुशी और उत्साह का माहौल है। बीएसएफ में चयन के बाद खिलेश्वर साहू ने शारीरिक, मानसिक और अनुशासनात्मक प्रशिक्षण को पूरी निष्ठा और साहस के साथ पूर्ण किया। यह प्रशिक्षण देश की प्रतिष्ठित अर्धसैनिक बल में सेवा के लिए आवश्यक होता है। खिलेश्वर साहू रविवार को बीएसएफ के एक वर्ष के प्रशिक्षण को पूरा कर जब घर लौटे, तो पूरा गांव सम्मान और गर्व से झूम उठा।विजय साहू का स्वागत गाजे बाजे आतिशबाजी के साथ फूल-मालाओं, रैली और जयकारों के बीच किया गया। लोगों ने बीएसएफ जवान का फूल-मालाओं से स्वागत कर भारत माता की जय के नारे लगाए।

खिलेश्वर साहू का गांव में हुआ भव्य स्वागत

पिछले वर्ष जनवरी में ग्वालियर में ट्रेनिंग के लिए रवाना हुए खिलेश्वर साहू ने एक वर्ष की कड़ी ट्रेनिंग पूरी की। जब वह अपने गांव लौटा, तो गांववालों ने उसका स्वागत दिल खोलकर किया।गाजे बाजे के साथ भव्य रैली निकाली गई। हर कोई उसकी इस उपलब्धि पर खुशी से झूम रहा था। खिलेश्वर साहू ने अपने गांव के हनुमान मंदिर में पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद लिया और अपने परिवार से मिलकर उनका आभार व्यक्त किया.

परिवार और गांव का गौरव बना खिलेश्वर साहू

खिलेश्वर साहू के पिता मोतीलाल साहू ने कहा कि अपनी मेहनत और आत्मविश्वास से यह मुकाम हासिल किया।आज वह सेना में है और इससे हमें बहुत गर्व है।गांव के बुजुर्ग और युवा उसकी इस सफलता से बेहद खुश हैं। पूर्व सरपंच कमलेश श्रीवास्तव व गांव के प्रमुख धनराज साहू ने कहा कि सामान्य परिवार के बेटे का बीएसएफ में चयन होना पूरे गांव के लिए प्रेरणादायक है। इससे गांव के और बच्चे भी प्रेरित होंगे और अपने सपनों को साकार करने के लिए मेहनत करेंगे।

मां ने अपने बेटे की आरती उतारकर किया स्वागत

बता दे कि खिलेश्वर साहू एक गरीब परिवार की बेटा है और उसके पिता मोतीलाल साहू किसानी कार्य करते है। जब वह फौज में सिलेक्शन के बाद ट्रेनिंग लेकर लौटी तो गांव ने जुलूस निकालकर भव्य स्वागत किया गया। गांव वालों का प्रेम देखकर खिलेश्वर की आंखों में आंसू आ गए। जब खिलेश्वर अपने घर पहुंची तो बड़े बुजुर्गों से आशीर्वाद लेने के बाद मां पिता का आशीर्वाद लिया। इस दौरान खिलेश्वर की मां ललिता साहू ने आरती उतारी और चंदन रोड़ी से तिलककर मिठाइयां खिलाया। इस दौरान अपने बेटा के गर्व को देख वह भी अपने आप को आशु रोक नहीं पाए वह भी भावुक हो गए।

युवाओं के लिए प्रेरणा बने खिलेश्वर साहू

खिलेश्वर साहू की यह सफलता केवल उसकी अपनी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह साबित करती है कि मेहनत और लगन से किसी भी परिस्थिति को बदला जा सकता है। उसकी कहानी अब गांव के युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है।उसकी तरह अब अन्य बच्चे भी बड़ी उम्मीदों और आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य को पाने के लिए मेहनत कर रहे हैं। खिलेश्वर साहू की यह कामयाबी ना केवल उसके परिवार के लिए खुशी का पल है, बल्कि यह दिखाती है कि अगर हिम्मत और हौसला हो, तो कोई भी सपना पूरा किया जा सकता है।इस अवसर पर बड़ी सख्या ने ग्राम की महिलाए पुरुष व बच्चे शामिल रहे।

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