परस साहू बालोद
प्रदेश भाजपा के 2025 के आदेश में वार्ड क्रमांक 26 की तत्कालीन बागी प्रत्याशी टी. ज्योति का नाम शामिल, ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम में संचालन को लेकर चर्चा
दल्ली राजहरा। भारतीय जनता पार्टी के नगरीय निकाय चुनाव 2025 के दौरान जारी एक निष्कासन आदेश को लेकर दल्ली राजहरा में एक बार फिर राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। 4 फरवरी 2025 को जारी प्रदेश भाजपा के आदेश की प्रति में नगरीय निकाय चुनाव के दौरान पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के विरुद्ध चुनाव लड़ने एवं अनुशासन भंग करने के मामले में कई कार्यकर्ताओं को 6 वर्ष के लिए पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किए जाने का उल्लेख है।
इस आदेश में नगरपालिका परिषद दल्ली राजहरा के वार्ड क्रमांक 26 से टी. ज्योति का नाम भी शामिल है। आदेश में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष के स्तर से कार्रवाई किए जाने का उल्लेख है।
आदेश के बावजूद कार्यक्रम में संचालन को लेकर सवाल
अब इसी आदेश को लेकर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि हाल ही में दल्ली राजहरा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के जन्मदिवस के अवसर पर आयोजित ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम में टी. ज्योति द्वारा संचालन किए जाने की चर्चा सामने आई है।
यहीं से स्थानीय राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि यदि प्रदेश स्तर से जारी आदेश में किसी व्यक्ति को छह वर्ष के लिए प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित किया गया है, तो पार्टी के स्थानीय कार्यक्रम में उन्हें मंच संचालन की जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई?
क्या निष्कासन आदेश की स्थिति में कोई बदलाव हुआ है?
क्या पार्टी ने बाद में उनका निष्कासन समाप्त या संशोधित किया है?
या फिर स्थानीय संगठन ने प्रदेश स्तर के आदेश की अलग व्याख्या की है?
इन सवालों का स्पष्ट जवाब फिलहाल सामने नहीं आया है।
पार्टी के ग्रुप में जोड़े जाने का भी दावा
स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि टी. ज्योति व अन्य निष्कासित पार्षद को भाजपा से जुड़े कुछ स्थानीय व्हाट्सऐप/संगठनात्मक ग्रुपों में जोड़ा गया है। हालांकि, इन ग्रुपों में जोड़े जाने की स्थिति और उसका आधिकारिक संगठनात्मक अर्थ क्या है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
गौरतलब है कि फरवरी 2025 में प्रकाशित रिपोर्टों में भी दल्ली राजहरा के वार्ड 26 से टी. ज्योति सहित अन्य लोगों के खिलाफ भाजपा की कार्रवाई का उल्लेख किया गया था।
क्या प्रदेश के आदेश और स्थानीय संगठन की गतिविधियों में अंतर?
अब पूरे मामले ने संगठनात्मक अनुशासन को लेकर बहस छेड़ दी है। एक तरफ प्रदेश स्तर से जारी लिखित आदेश में छह वर्ष के निष्कासन की बात दर्ज है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय भाजपा कार्यक्रम में उनकी सक्रिय भूमिका चर्चा का विषय बन गई है।
हालांकि, यह कहना अभी उचित नहीं होगा कि दल्ली राजहरा मंडल ने जानबूझकर प्रदेश संगठन के आदेश की अवहेलना की है, क्योंकि निष्कासन के बाद किसी प्रकार की बहाली, आदेश में संशोधन या अन्य संगठनात्मक निर्णय हुआ हो सकता है, जिसकी जानकारी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।
इसलिए अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल भाजपा संगठन से है—
क्या टी. ज्योति का निष्कासन अभी भी प्रभावी है?
यदि प्रभावी है तो उन्हें भाजपा के कार्यक्रम में संचालन की जिम्मेदारी किस आधार पर दी गई?
और यदि निष्कासन समाप्त या संशोधित हो चुका है, तो उस संबंध में आदेश या आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
फिलहाल ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम में टी. ज्योति की भूमिका और 4 फरवरी 2025 के प्रदेश भाजपा निष्कासन आदेश के बीच दिखाई दे रहे इस अंतर ने दल्ली राजहरा भाजपा संगठन की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चाओं को जरूर तेज कर दिया है।

