लीलाधर साहू
गुण्डरदेही।
क्षेत्र में धान की कटाई पूर्ण होते ही एक बार फिर अर्जुन वृक्ष की अंधाधुंध कटाई शुरू हो गई है। वन विभाग, राजस्व विभाग एवं पुलिस विभाग की सांठगांठ के चलते लकड़ी माफिया दिनदहाड़े अर्जुन वृक्ष की अवैध कटाई कर रहे हैं। वहीं रात्रि में मेटाडोर , व ट्रैक्टर लकड़ी की लोडिंग कर सुबह 3 बजे से 5 बजे तक परिवहन कर रहे हैं।
इधर वन विभाग, राजस्व विभाग एवं पुलिस विभाग द्वारा लकड़ी माफियाओं पर कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। लकड़ी कोचिया गांव गांव में घूम रहे हैं और किसानों को पैसे का लालच देकर वृक्ष खरीद रहे हैं। प्रत्येक वर्ष लगातार लकड़ी की कटाई के चलते पर्यावरण को हानि हो रहा है। अगर जल्द ही इन लकड़ी कोचिंयों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आगामी दिनों में आम जनमानस को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।
आपको बता दें कि इन्हीं पेड़ पौधों से हमें शुद्ध ऑक्सीजन मिलता है। साथ ही फल फूल एवं छांव भी मिलता है। गर्मी के दिनों में जहां तापमान 45 डिग्री के ऊपर पहुंच जाता है तो लोग पेड़ की छांव की ओर रुख करते हैं। बीते गर्मी के समय तापमान 45 डिग्री के ऊपर पहुंच गया था जिससे आम जनता काफी परेशान थे। परंतु इससे लकड़ी माफियाओं और संबंधित विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। और विभागीय अधिकारियों के संरक्षण के चलते क्षेत्र में अंधाधुन अर्जुन वृक्ष सहित फ़लदार एवं छांवदार वृक्षों की कटाई की जा रही है।
केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा वातावरण संतुलित बनाए रखने के लिए हर साल लाखों, करोड़ों रुपए खर्च कर पौधारोपण किया जा रहा है। साथ ही पर्यावरण एवं वातावरण सुरक्षित रखने के लिए लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है, परंतु वन विभाग, राजस्व विभाग एवं पुलिस विभाग के अधिकारियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। विभागीय अधिकारियों के संरक्षण के चलते लकड़ी माफियाओं के हौसले बुलंद हैं।
जिला प्रशासन एवं स्थानीय प्रशासन द्वारा अगर गांव गांव में लकड़ी कटाई की रोकथाम के लिए मुनादी की जाए तो इस पर नियंत्रण किया जा सकता है। परंतु जिम्मेदार अधिकारियों को अपने कार्यालय से निकलने की फुर्सत नहीं है। साथ ही प्रशासन की कमजोर सूचना तंत्र के चलते भी अर्जुन वृक्ष सहित छांवदार एवं फलदार वृक्षों की कटाई एवं परिवहन को बढ़ावा मिल रहा है।

