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महात्मा गांधी गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में बालोद जिले ने बनाई अपनी अलग पहचान लक्ष्य 41.85 लाख के विरूद्ध 47.27 लाख मानव दिवस रोजगार का किया गया सृजन।

लीलाधर साहू

गुण्डरदेही।

कलेक्टर इन्द्रजीत सिंह चन्द्रवाल के मागदर्शन एवं जिला पंचायत के मुख्य कार्यपानल अधिकारी डाॅ. संजय कन्नौजे के निर्देशन में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना अंतर्गत बालोद जिले ने अपनी अलग पहचान बनाई है। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी डाॅ. संजय कन्नौजे ने बताया कि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों का लगातार क्षेत्र भ्रमण कर योजनाओं का सफल क्रियान्वयन किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि मनरेगा अंतर्गत शासकीय योजनाओं से लाभान्वित करते हुए वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले का कुल लक्ष्य 41.85 लाख मानव दिवस था। जिसके विरूद्ध 47.27 लाख मानव दिवस रोजगार का सृजन किया गया, जो लक्ष्य का 113 प्रतिशत उपलब्धि है। ग्रामीण अंचलों में रोजगार देने का सिलसिला वनांचल क्षेत्र से लेकर मैदानी क्षेत्रों तक लगातार जारी है। ग्रामीणों को अधिक से अधिक रोजगार के साधन गांव में ही प्राप्त हुए।

डाॅ. सीईओ कन्नौजे ने बताया कि जिले में पंजीकृत महिलाआंे को सर्वाधिक रोजगार मिला है। इसके अंतर्गत जिले में पंजीकृत 1.15 लाख ग्रामीण महिलाओं को 32.64 लाख मानव दिवस सृजित कर रोजगार उपलब्ध कराते हुए उनकी आजीविका में वृद्धि हुई है जो कि प्रदेश में महिलाओं को रोजगार देने में तीसरे पायदान पर है। इसके साथ ही दिव्यांग श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। उन्होंने बताया कि जिले में ’हर हाथ को कम काम का वाजिब दाम’ के कहावत को चरितार्थ करते हुए कुल 1052 दिव्यांग श्रमिकों को उनके आवश्यकता अनुरूप कार्य प्रदान करते हुए रोजगार उपलब्ध कराया गया है जो कि प्रदेश में दिव्यांग श्रमिकों को रोजगार देने में आठवें पायदान पर है।

सीईओ डाॅ. कन्नौजे ने बताया कि मनरेगा अंतर्गत श्रमिकों को समयबद्ध मजदूरी भुगतान भी किया गया है। मनरेगा अंतर्गत श्रमिकों को 15 दिवस के भीतर मजदूरी भुगतान किये जाने का प्रावधान है जिसके अनुरूप बालोद जिले में श्रमिकों को मजदूरी भुगतान उनके बैंक खातों में आधार बेस्ड के माध्यम से सीधे जारी किया गया है। समयबद्ध मजदूरी भुगतान का प्रतिशत जिले में 99.10 है, जो कि प्रदेश में तीसरे पायदान पर है। इसके अलावा प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन संबंधी कार्यों में व्यय का प्रतिशत शासन द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप 65.38 प्रतिशत जिले में व्यय हुई है, जो कि 100.58 प्रतिशत उपलब्धि हासिल करते हुए प्रदेश में पांचवा पायदान पर है।

वित्तीय वर्ष 2024-25 एवं पूर्व वर्षों के योजनांतर्गत स्वीकृत कार्यों में परिसंपत्तियों का सृजन करते हुए प्राथमिकता के साथ 91.04 प्रतिशत स्वीकृत कार्यों को समय-सीमा में पूर्ण कराया गया है, जो कि प्रदेश में तीसरे पायदान पर है। जिला प्रशासन द्वारा प्राथमिकता के साथ समय-समय पर अधिकारियो का समीक्षा बैठक आहूत करते हुए सामाजिक अंकेक्षण निकासी बैठक में पारित निर्णयों का प्रकरण वार निराकरण किया जाता है। जिसके परिणाम स्वरूप कुल प्रकरणों में से 80 प्रतिशत प्रकरण का निराकरण किया जा चुका है, जो कि प्रदेश में तीसरे पायदान पर है।

सीईओ जिला पंचायत डाॅ. संजय कन्नौजे ने बताया कि अमृत सरोवर निर्माण, डबरी निर्माण, नया तालाब निर्माण, नाली निर्माण, पहुंच मार्ग, पशु शेड के साथ प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण में मजदूरी का कार्य एवं स्वच्छ भारत मिशन के तहत अभिसरण जैसे अनेक कार्य इस योजना में हो रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन के लिए सामुदायिक एवं हितग्राही मूलक कार्य भी किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण विकास मे महात्मा गांधी नरेगा योजना की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। बालोद जिला इस योजना के क्रियान्वयन में लंबे समय से अग्रणी बना हुआ है। अधोसंरचना विकास के साथ आजीविका संवर्धन के लिए इस योजना से अनेकों कार्य हो रहे हैं।

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