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मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रमेश चन्द्र सिन्हा ने जिला न्यायालय भवन परिसर बालोद में डिजिटाइजेशन एवं स्कैनिंग कक्ष का किया वर्चुअली शुभारंभ डिजिटाइजेशन को बताया वर्तमान समय की प्रमुख आवश्यकता।

लीलाधर साहू

गुण्डरदेही।

छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रमेश चन्द्र सिन्हा ने आज जिला न्यायालय भवन परिसर बालोद में डिजिटाइजेशन एवं स्कैनिंग कक्ष का वर्चुअली शुभारंभ किया। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के डिजिटाइजेशन कमेटी के चेयरमेन जस्टिस नरेन्द्र व्यास भी डिजिटाइजेशन एवं स्कैनिंग कक्ष के शुभारंभ अवसर पर उपस्थित थे।

इस अवसर पर मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रमेश सिन्हा ने जिला एवं सत्र न्यायालय बालोद सहित न्यायिक जिला राजनांदगांव, कबीरधाम एवं मुंगेली के जिला एवं सत्र न्यायालयों में स्थापित डिजिटाइजेशन एवं स्कैनिंग कक्ष का एक साथ वर्चुअली शुभारंभ किया। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस रमेश चन्द्र सिन्हा ने डिजिटाइजेशन को वर्तमान समय की प्रमुख आवश्यकता बताते हुए आज प्रदेश के चारों न्यायिक जिला बालोद, राजनांदगांव, कबीरधाम एवं मुंगेली में डिजिटाइजेशन एवं स्कैनिंग कक्ष का शुभारंभ होने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसके लिए जिलेवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर उन्होंने वर्तमान समय में डिजिटाइजेशन के महत्व एवं उद्देश्यों के संबंध में भी जानकारी दी।

जिला न्यायालय भवन परिसर बालोद में आयोजित डिजिटाइजेशन एवं स्कैनिंग कक्ष के शुभारंभ समारोह के अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्याम लाल नवरत्न, कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा, परिवार न्यायालय के न्यायाधीश योगेश पारीक, पुलिस अधीक्षक योगेश पटेल सहित प्रथम जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कृष्ण जांगडे, द्वितीय जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश श्वेता उपाध्याय गौर, जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एफटीएससी (पॉक्सो) कृष्ण सूर्यवंशी, जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एफटीसी ताजुद्दीन आसिफ, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संजय सोनी विशेष रूप से उपस्थित थे।

इस अवसर पर प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्याम लाल नवरत्न ने फीता काटकर डिजिटाइजेशन एवं स्कैनिंग कक्ष का विधिवत शुभारंभ किया। समारोह को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्याम लाल नवरत्न ने कहा कि आज जब हम 21वीं सदी में प्रवेश किए हैं। ऐसे अत्याधुनिक समय में डिजिटाइजेशन सबसे बड़ी मांग एवं प्रमुख आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि आज से कुछ समय पहले किसी ने कल्पना भी नहीं की थी, कम्प्यूटरीकृत प्रणाली से हमें सभी चीजों की सूचना एवं सहुलियत मिलने लगेगी। नवरत्न ने कहा कि 21वीं सदी में हम फिजिकल मोड से डिजिटल मोड पर आ गए हैं।

उन्होंने कहा कि डिजिटाइजेशन के माध्यम से न्यायिक प्रक्रिया तीव्र गति से संपादित होने के अलावा दस्तावेजों की भी सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी। इसके साथ ही दस्तावेज पेपरलेस होने से दस्तोवेजों की बोझ भी कम होगा। इस अवसर पर उन्होंने आज के इस समारोह को सफलतापूर्वक सम्पन्न करने में सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने हेतु कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा एवं जिला प्रशासन बालोद, जिला एवं सत्र न्यायाधीश कार्यालय बालोद के सभी न्यायाधीश, अधिकारी-कर्मचारी, बार एसोसिएशन के पदाधिकारी, अधिवक्ताओं एवं कार्यक्रम को सफल बनाने में प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग प्रदान करने वाले सभी लोगों को हृदय से धन्यवाद ज्ञापित करते हुए उनके विनम्र आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी, डौण्डीलोहारा सतप्रीत कौर छाबड़ा, जिला विधिक सेवा प्राधिकरणक के सचिव भारती कुलदीप सहित अपर कलेक्टर एवं एसडीएम नूतन कंवर एवं द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी हीरा सिन्हा, अतिरिक्त न्यायाधीश प्रथम व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी  सागर चंद्राकर, प्रथम व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी भूमिका धु्रव, तहसीलदार आशुतोष शर्मा, जिला अधिवक्ता संघ बालोद के अध्यक्ष अजय साहू के अलावा बड़ी संख्या में अधिकारी-कर्मचारी एवं अधिवक्तागण उपस्थित थे।

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