लीलाधर साहू
गुण्डरदेही।
तालाब में तैरते हुए 40 फीट ऊंचे रावण भव्य आतीसबाजी का होगा दहन, राक्षसों के जमीन अथवा आसमान में नहीं मरने जैसे चतुराई वाले वरदानों के किस्से जरूर सुने होंगे। 2 अक्टूबर को यहां सिरसिदा में इसे देखा भी जा सकता है। अंडा से 7 कि. मी. दूरी व बालोद जिला मुख्यालय से अंतिम छोड 40 किमी दूर जिले के ग्राम सिरसिदा में दशहरा पर जमीन अथवा आसमान में नहीं बल्कि तालाब के बीचोबीच तैरते हुए रावण का दहन किया जाता है। राक्षसों के जमीन अथवा आसमान में नहीं मरने जैसे चतुराई वाले वरदानों के किस्से जरूर सुने होंगे।
यहां सिरसिदा में इसे देखा भी जा सकता है। बालोद जिला मुख्यालय से 40 किमी दूर जिले के ग्राम सिरसिदा में दशहरा पर जमीन अथवा आसमान में नहीं बल्कि तालाब के बीचोबीच तैरते हुए रावण का दहन किया जाता है। रावण दहन के दौरान तालाब के बीच आकर्षक अतिशबाजी भी होती है। तब गांव के कुछ लोगों का अलग करने का जुनून और अब तालाब के बीच रावण दहन की परंपरा आगे बढ़ रही है। 27 वर्षों से जला रहे 40 फीट का पुतला का भव्य आतीसबाजी के साथ दहन होगा।
इस कार्यक्रम में अतिथि गण अध्यक्ष जनपद पंचायत गुण्डरदेही पुरुषोत्तम चंद्राकर, ग्राम पंचायत सिरसिदा सरपंच सरस्वती इन्द्रजीत चंद्राकर सिरसिदा के समिति के अध्यक्ष कुलेश्वर प्रसाद देवांगन उपाध्यक्ष अक्षय चंद्राकर सचिव नेलशन देवांगन सदस्य खेमन , प्रहलाद, लवण, रामगोपाल, चंद्र प्रकाश, ढालसिंह, टोमेन्द्र, डोगेन्द्र, बालगोविंद, तोरण गिरधर, प्रेमलाल, धर्मराज, खिल्लू, गुलाब, कोमेंद्र, रितेश, जितेश्वर, तानु देवेन्द्र , छन्नु धन्ना, गौरव, यशवंत, चंदन, आशीष, तुलेश्वर, रामकृष्ण, मिलन, दीपक, खिलेंद्र आत्मा साहू लक्ष्मण चंद्राकर आदि ने बताया कि कुछ अलग करने के जुनून में वर्ष 1994 में पहली बार तालाब के बीच रावण का पुतला खड़ा कर जलाया गया। शुरुआत के कुछ सालों को छोड़ कर हर बार 40 फीट का पुतला जलाया जा रहा हैं। समिति के सदस्यों ने बताया कि रात्रि कालीन 11:00 बजे छत्तीसगढ़ी कार्यक्रम रंग मया कोडेवा की प्रस्तुती दी जायेगी। यह जानकारी पूर्व सरपंच खेमन लाल चन्द्राकर ने दी।

