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धान फसल कटाई पश्चात् खेत में बेलर मशीन से चारा संग्रहण कर रहे हैं किसान सोमेेश साहू

फसलों के अवशेषों को नष्ट न करते हुए पशुओं के लिए चारा संग्रहण करने किसानों से की अपील, ग्रीष्मकालीन धान के बदले दलहन-तिलहन फसल लेकर, फसल चक्र को अपनाने कर रहे हैं प्रेरित

लीलाधर साहू 

बालोद।

धान के फसल की कटाई के पश्चात बचे हुए अवशेषों को बेलर मशीन के माध्यम से संग्रहित कर कृषक रत्न से सम्मानित श्री सोमेश साहू अपने पशुओं के चारा हेतु बेहतर व्यवस्था कर रहे हैं। जिले के डौण्डी विकासखण्ड के ग्राम गुजरा के कृषक रत्न से सम्मानित श्री साहू ने कृषि क्षेत्र में अपनी प्रगतिशील सोच से एक मिसाल कायम की है। उन्होंने धान कटाई के बाद फसल अवशेषों (पराली) को न जलाकर, उसे बेलर मशीन के माध्यम से संग्रहित करने का अनूठा कार्य किया है। उन्होंने बताया कि उनके पास लगभग 45 पशु है। जिनके लिए नियमित रूप से चारा की आवश्यकता होती है। जिसके लिए वे अपने खेत में धान की कटाई के पश्चात बचे अवशेष (पराली) को जिला खनिज न्यास मद से प्राप्त बेलर मशीन का उपयोग कर संग्रहित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि फसल अवशेष को खेत में न जलाकर उसे संग्रहित करना चाहिए। इस फसल अवशेष को जलाने से पर्यावरण प्रदूषण, मृदा में उपस्थित सूक्ष्म जीव की हानि, मित्र कीटों को नुकसान इसके साथ ही जमीन में उपजाऊ क्षमता में प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि गिरते भू-जल स्तर को सुधारने के लिए ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन, तिलहन, गन्ना, मक्का, गेहूँ इत्यादि कम जल संचय करने वाली फसलों को लगाना चाहिए तथा फसल चक्र को अपनाना चाहिए।

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