परस साहू बालोद
मैजिक एंड आर्ट यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद-नई दिल्ली में हुआ गरिमामय सम्मान समारोह
बालोद। बालोद जिले की प्रसिद्ध कवयित्री, लेखिका एवं व्याख्याता गायत्री साहू को साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उनके शोधपरक कार्य एवं उल्लेखनीय योगदान के लिए मैजिक एंड आर्ट यूनिवर्सिटी, फरीदाबाद-नई दिल्ली द्वारा मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके साहित्यिक एवं शैक्षणिक जीवन की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस गरिमामय अवसर पर आयोजित सम्मान समारोह में मुख्य अतिथि माननीय गुरुनाम सैनी, मंत्री, हरियाणा शासन रहे। समारोह की अध्यक्षता डॉ. राम अवतार शर्मा, अधिवक्ता, माननीय उच्चतम न्यायालय, नई दिल्ली एवं चेयरमैन, अंतरराष्ट्रीय मानव कल्याण संस्थान ने की। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि डॉ. राजेंद्र सैनी, फरीदाबाद उपस्थित रहे।
गायत्री साहू लंबे समय से शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। कवयित्री एवं लेखिका के रूप में उन्होंने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक सरोकारों, नारी सम्मान, मानवीय संवेदनाओं एवं समसामयिक विषयों को प्रभावशाली अभिव्यक्ति प्रदान की है। वहीं व्याख्याता के रूप में वे शिक्षा के क्षेत्र में भी निरंतर अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही हैं। गायत्री साहू की दो पुस्तकों का विमोचन हो चुका है। उनकी पुस्तक ‘रक्तदान जीवन का अनुष्ठान’ समाज में रक्तदान के प्रति जागरूकता एवं मानवीय सेवा का प्रेरणादायी संदेश देती है। उनकी 25 से अधिक रचनाएँ विभिन्न स्थानीय, प्रांतीय एवं राष्ट्रीय स्तर के साहित्यिक संकलनों में प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके साथ ही उनके द्वारा रचित अनेक हिंदी एवं छत्तीसगढ़ी गीतों के ऑडियो एल्बम भी रिलीज हो चुके हैं, जिनमें सामाजिक एवं जनजागरूकता से जुड़े संदेशों को प्रमुखता दी गई है। कोरोना महामारी के कठिन दौर में भी गायत्री साहू ने पोस्टर, गीत, कविताओं एवं रंगोली के माध्यम से लोगों को जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे सामाजिक सरोकारों से भी निरंतर जुड़ी हुई हैं।
पौधारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उनके प्रयास उल्लेखनीय हैं। गर्मी के मौसम में पशु-पक्षियों के लिए सकोरा वितरण अभियान वे पिछले कई वर्षों से संचालित कर रही हैं और लोगों को जीव-जंतुओं के प्रति संवेदनशील एवं जागरूक होने के लिए प्रेरित करती आ रही हैं। साहित्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में उनके शोध, सृजनात्मक कार्य एवं सामाजिक योगदान को सम्मान देते हुए प्रदान की गई यह मानद डॉक्टरेट की उपाधि उनके लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि है। यह सम्मान न केवल गायत्री साहू के लिए, बल्कि बालोद जिले एवं छत्तीसगढ़ की साहित्यिक प्रतिभा के लिए भी गौरव का विषय है।
समारोह में उपस्थित अतिथियों ने गायत्री साहू को इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए उनके साहित्यिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक योगदान की सराहना की। इस अवसर पर गायत्री साहू ने कहा कि यह सम्मान उनके साहित्यिक एवं शैक्षणिक जीवन की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह सम्मान उन्हें समाज, शिक्षा एवं साहित्य के क्षेत्र में और अधिक समर्पण, ऊर्जा एवं निष्ठा के साथ कार्य करने की प्रेरणा देगा। उन्होंने इस उपलब्धि के लिए अपने परिवार, गुरुजनों, सहकर्मियों, साहित्यप्रेमियों एवं शुभचिंतकों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त किया।
शुभकामनाएँ प्रेषित करने वालों में गायत्री साहू को मानद डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त होने पर समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत के संस्थापक डॉ. मुकेश कुमार व्यास ‘स्नेहिल’ (गुजरात), तुलसी मानस प्रतिष्ठान के अध्यक्ष जगदीश देशमुख, सीताराम साहू श्याम वरिष्ठ साहित्यकार एवं लोक कलाकार बालोद, तोमनं लाल साहू जी चेयरमैन भारत रेड क्रॉस सोसाइटी छत्तीसगढ़ प्रांत रायपुर, वीरेंद्र कुमार देशमुख प्रसिद्ध नाड़ी वैद्य विशेषज्ञ एवं आयुर्वेदाचार्य तथा 64 योगिनी मंदिर के संस्थापक लिमोरा राष्ट्रीय संगठन मंत्री गजेंद्र हरिहारनो ‘दीप’, प्रांतीय अध्यक्ष अखिलेश्वर प्रसाद मिश्रा ‘अकाट्य’ जी, समरस संस्थान साहित्य सृजन भारत, छत्तीसगढ़ एवं प्रेरणा साहित्य समिति, बालोद सहित साहित्यिक, सामाजिक एवं शैक्षणिक क्षेत्र से जुड़े अनेक साहित्यकारों, पदाधिकारियों एवं शुभचिंतकों, शंकर नगर के सभी कॉलोनीवासियों ने हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं प्रेषित की हैं।
सभी ने गायत्री साहू के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उनके साहित्यिक, शैक्षणिक एवं सामाजिक योगदान की सराहना की और इस उपलब्धि को बालोद जिले एवं छत्तीसगढ़ के लिए गौरव का विषय बताया।
गायत्री साहू को मिली यह मानद डॉक्टरेट की उपाधि बालोद जिले की साहित्यिक प्रतिभा को राष्ट्रीय स्तर पर मिली एक महत्वपूर्ण पहचान है। उनकी इस उपलब्धि से जिले के साहित्यकारों, शिक्षकों एवं शुभचिंतकों में हर्ष का माहौल है।

