शिक्षा के साथ संस्कृति आवश्यक, दोनों के संगम से ही गढ़ा जा सकता है उज्ज्वल भविष्य – तारणी पुष्पेंद्र चंद्राकर।
लीलाधर साहू गुण्डरदेही। *रनचिरई और परसदा के शालाओं में धूमधाम से मना बसंत पंचमी एवं वार्षिकोत्सव* *बालोद :-* शिक्षा के मंदिर में जब ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती की वंदना और बच्चों की कलात्मक प्रतिभा का मेल होता है, तो वह दृश्य अत्यंत प्रेरणादायी बन जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा ग्राम रनचरई और…

