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नगर पालिका बालोद: RTI में बड़ा खुलासा, फिर भी ‘सुशासन’ मौन!

परस साहू बालोद

बिना प्रशासनिक स्वीकृति वर्षों से चल रहा डिजिटल लेखा-जोखा; जनदर्शन के 72 दिन बाद भी जिला प्रशासन का रुख उदासीन, आखिर किसकी शह पर दब रही फ़ाइल?
​बालोद। एक तरफ छत्तीसगढ़ शासन पारदर्शिता, सुशासन और जन-समस्याओं के त्वरित समाधान के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, तो दूसरी तरफ जिला मुख्यालय बालोद में ही प्रशासनिक ढिलाई और नियमों की अनदेखी का एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है। नगर पालिका परिषद बालोद में बिना किसी वैध प्रशासनिक आदेश के वर्षों से संचालित कंप्यूटराइजेशन एवं डिजिटल लेखा-जोखा प्रणाली को लेकर उठे सवालों पर ढाई महीने से अधिक (72 दिन) का समय बीत जाने के बाद भी जिला प्रशासन ने चुप्पी साध रखी है।

इस गंभीर मामले में RTI के जरिए हुए बड़े खुलासे और जनदर्शन में की गई शिकायत के बावजूद अब तक कार्यवाही शून्य है, जिससे शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली और सुशासन के दावों पर कड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
​खुलासा: RTI आवेदन (दिनांक 02/04/2026) से खुली बिना स्वीकृति संचालन की पोल
​मामले की शुरुआत तब हुई जब बालोद के जागरूक नागरिक उमेश कुमार सेन (निवासी: कांशीराम तालाब के पास, वार्ड नं. 07, बालोद) ने सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के तहत दिनांक 02 अप्रैल 2026 को आवेदन (RTI) लगाकर नगर पालिका बालोद में कंप्यूटर सुविधा एवं डिजिटल लेखा-जोखा प्रणाली की शुरुआत, संचालन और इसके रखरखाव संबंधी प्रशासनिक स्वीकृति व प्रस्ताव की सत्यापित प्रति मांगी।

नगर पालिका परिषद बालोद के जन सूचना अधिकारी द्वारा 30 अप्रैल 2026 को जो आधिकारिक लिखित जवाब दिया गया, उसने प्रशासनिक तंत्र में हड़कंप मचा दिया। जन सूचना अधिकारी ने लिखित रूप में स्वीकार किया कि: “नगर पालिका बालोद में कंप्यूटर सुविधा एवं डिजिटल लेखा-जोखा प्रणाली की शुरुआत हेतु कोई भी प्रशासनिक आदेश या प्रस्ताव उपलब्ध नहीं है।” ​बड़ा सवाल: जब किसी सरकारी निकाय में करोड़ों के वित्तीय व प्रशासनिक लेनदेन से जुड़ी प्रणाली का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड या स्वीकृति आदेश ही नहीं है, तो इतने वर्षों से यह व्यवस्था किसकी अनुमति और किसकी जिम्मेदारी पर चल रही है? जनदर्शन और सुशासन त्योहार (12/05/2026) में शिकायत, पर 72 दिनों से नतीजा ‘सिफर’ RTI से मिले इस चौंकाने वाले जवाब के बाद आवेदक ने दिनांक 12 मई 2026 को ‘जनदर्शन सह सुशासन त्योहार’ में जिला प्रशासन (कलेक्टर) के समक्ष लिखित आवेदन प्रस्तुत कर इस संदिग्ध मामले की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्यवाही की मांग की थी। समय-सीमा का कड़वा सच: 12 मई 2026 को दिए गए इस आवेदन पर आज 23 जुलाई 2026 तक पूरे 2 महीने 11 दिन (कुल 72 दिन) बीत चुके हैं। नियमतः जनदर्शन में प्राप्त आवेदनों का निराकरण समयबद्ध सीमा के भीतर होना चाहिए, लेकिन 72 दिन बीत जाने के बाद भी न तो आवेदक को कार्यवाही की कोई स्थिति बताई गई और न ही नगर पालिका के इस संदिग्ध रिकॉर्ड की जांच शुरू की गई।

प्रशासनिक चुप्पी पर उठते तीखे सवाल:
​यदि नगर पालिका में सब कुछ नियमानुसार है, तो 72 दिनों में जांच रिपोर्ट सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की गई?
​02/04/2026 को RTI और 12/05/2026 को जनदर्शन में शिकायत के बाद भी फ़ाइल किस टेबल पर और किसके दबाव में अटकी हुई है? ​क्या बिना प्रशासनिक स्वीकृति के डिजिटल लेखा-जोखा संचालित कर वित्तीय अनियमितताओं को छुपाने का प्रयास किया जा रहा है? ​यदि जनदर्शन में दिए आवेदनों पर महीनों तक कोई जवाब न मिले, तो आम नागरिक सुशासन की उम्मीद किससे करे? तत्काल उच्च स्तरीय जांच और सख्त निर्देश की आवश्यकता ​नगर पालिका बालोद का यह मामला केवल एक नागरिक की शिकायत भर नहीं है, बल्कि यह सार्वजनिक धन और शासकीय प्रक्रियाओं की शुचिता से जुड़ा गंभीर विषय है।

नगर के प्रबुद्ध नागरिकों और आवेदक का कहना है कि जिला प्रशासन को इस मामले में तुरंत संज्ञान लेते हुए नगर पालिका बालोद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) व संबंधित शाखा प्रभारियों को कारण बताओ नोटिस जारी करना चाहिए तथा एक निष्पक्ष जांच समिति गठित कर 12 मई 2026 के जनदर्शन आवेदन पर अविलंब कार्यवाही के निर्देश जारी करने चाहिए। अब देखना यह होगा कि जनहित से जुड़े इस संवेदनशील मुद्दे पर जिला प्रशासन कब तक नींद से जागता है और दोषियों पर क्या ठोस कदम उठाता है।

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