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जिला पंचायत सीईओ के मार्गदर्शन में आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम आईएफसी क्लस्टर के तहत स्व सहायता समूह की 26 दीदियों को किया गया 875 चूजा वितरण।

परस साहू बालोद

छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के मूल प्रावधानों एवं ग्रामीण महिलाओं के सर्वांगीण सशक्तीकरण के उद्देश्यों को साकार करने की दिशा में बालोद जिले में एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। जिला पंचायत बालोद के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील कुमार चंद्रवंशी के कुशल मार्गदर्शन एवं सतत प्रेरणा से जिले में स्व-सहायता समूहों की दीदियों को स्थायी आजीविका से जोड़ने का कार्य तीव्र गति से संचालित किया जा रहा है।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण निर्धन परिवारों को संगठित कर स्व-सहायता समूहों से जोड़ना, संस्थागत ढांचा मजबूत करना, एवं बहु-आयामी आजीविका गतिविधियों के माध्यम से उनकी वार्षिक आय बढ़ाकर उन्हें गरीबी से बाहर निकालना है। इसी सोच के अनुरूप जिले में इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर की अवधारणा पर कार्य किया जा रहा है। इसी क्रम में बालोद विकासखंड अंतर्गत वृंदावन संकुल स्तरीय संगठन जमरूवा (सिवनी) को इंटीग्रेटेड फार्मिंग क्लस्टर के रूप में विकसित किया गया है।

इस क्लस्टर में मुख्य रूप से 03 क्लस्टर हर्राठेमा, देवारभाट एवं मुल्लेगुड़ा शामिल हैं, जिनके अंतर्गत लगभग 1000 ग्रामीण परिवारों को आजीविका संवर्धन हेतु आच्छादित किया जा रहा है। आईएफसी का मुख्य उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण महिला परिवार को कम से कम 02 से 03 पूरक आजीविका गतिविधियों (जैसे- कृषि, पशुपालन, कड़कनाथ, बैकयार्ड कुक्कुट पालन, उद्यानिकी आदि) से जोड़कर उनकी वार्षिक आय में उल्लेखनीय एवं स्थायी वृद्धि करना है।

सहायक परियोजना अधिकारी नितेश साहू ने बताया कि इंटिग्रेटेड फार्मिंग कलस्टर के तहत बिहान से जुडी दीदियों के सतत एवं सवहनीय आजीविका सवर्धन हेतू 17 अगस्त को 21 स्व सहयता समूह की 26 सदस्यों को उन्नत किश्म का 30 दिवसीय चूजा आईएफसी के प्रावधान के अनुरूप प्रदाय कराया गया है। कार्यक्रम के दौरान दीदियों को केवल चूजा वितरण ही नहीं किया गया, बल्कि आजीविका के इस साधन से अधिकतम लाभ अर्जित करने हेतु तकनीकी मार्गदर्शन भी प्रदान किया गया। बिहान कैडर एवं विशेषज्ञों द्वारा दीदियों को चूजों के शुरुआती 30 से 40 दिनों की विशेष देखरेख एवं प्रबंधन, संतुलित दाना एवं स्वच्छ पेयजल व्यवस्था, समय पर टीकाकरण, रोग प्रतिरोधक उपचार एवं शेड प्रबंधन के संबंध में विस्तार से प्रशिक्षित व जागरूक किया गया।

जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुनील चंद्रवंशी ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ष्बिहान योजना का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को केवल समूह तक सीमित न रखकर उन्हें स्वावलंबी उद्यमी बनाना है। उन्होंने कहा कि बैकयार्ड पोल्ट्री और आईएफसी मॉडल से ग्रामीण दीदियों की दैनिक एवं मासिक आय में नियमित बढ़ोतरी होगी, जिससे वे ’लखपति दीदी’ की संकल्पना को साकार करते हुए अपने परिवार के सामाजिक व आर्थिक स्तर को ऊँचा उठा सकेंगी। इस अवसर पर विकासखंड के बिहान स्टाफ, संकुल स्तरीय संगठन की पदाधिकारी दीदियाँ एवं स्व-सहायता समूहों की सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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