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*जल संरक्षण में बालोद ने रचा कीर्तिमान, देश के टॉप-10 जिलों में बनाई जगह।*

परस साहू बालोद

*‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम, बालोद की जनभागीदारी बनी राष्ट्रीय मिसाल*

*बारिश की हर बूंद सहेजने की मुहिम को मिला जनअभियान का रूप, उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा को दी बधाई*

बालोद, 4 सितंबर 2026/ बारिश की हर बूंद को सहेजने और भू-जल स्तर को मजबूत बनाने की दिशा में बालोद जिले ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ (JSJB) अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में प्रथम स्थान हासिल किया है। इस उपलब्धि में बालोद जिले ने प्रभावी योगदान देते हुए देश के शीर्ष 10 जिलों में स्थान बनाया है।

बालोद जिले की इस उपलब्धि पर जिले के प्रभारी मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा को बधाई दी है। उन्होंने जिले में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि बालोद ने जल संरक्षण को सरकारी कार्यक्रम तक सीमित न रखकर इसे जनअभियान का रूप देने का सराहनीय कार्य किया है।

*कलेक्टर के नेतृत्व में जल संरक्षण को मिली नई गति*

कलेक्टर दिव्या उमेश मिश्रा के नेतृत्व में जिले में जल संरक्षण के कार्यों को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। गांवों में वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण, खेत-तालाब, जल संचयन संरचनाओं और पुराने जल स्रोतों के संरक्षण जैसे कार्यों को प्रोत्साहित किया जा रहा है।

इन कार्यों में ग्रामीणों, किसानों, ग्राम पंचायतों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। लोगों को यह संदेश दिया जा रहा है कि बारिश का पानी जहां गिरे, उसे वहीं रोककर सहेजना जल संकट से निपटने का सबसे प्रभावी तरीका है।

जल संरक्षण की संरचनाओं की जियो-टैगिंग, नियमित मॉनिटरिंग और समीक्षा से कार्यों की गुणवत्ता और पारदर्शिता पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

*खेतों में पानी रोककर भू-जल बढ़ाने पर जोर*

कृषि प्रधान बालोद जिले में जल संरक्षण का सीधा संबंध किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से है। जिले में खेतों और गांवों में बारिश के पानी को रोकने के लिए विभिन्न संरचनाओं का निर्माण किया जा रहा है।

किसानों को वर्षा जल का अधिक से अधिक उपयोग करने तथा खेतों में पानी रोकने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इससे एक ओर सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर भू-जल स्तर में सुधार को भी बढ़ावा मिलेगा।

*जनभागीदारी बनी बालोद की सबसे बड़ी ताकत*

बालोद की सफलता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि जल संरक्षण के कार्यों में सरकार के साथ आम लोगों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की गई है। ग्रामीणों और किसानों को जल संरक्षण के महत्व से जोड़ते हुए इसे सामूहिक जिम्मेदारी का रूप दिया गया है।

जिले में जल संरक्षण को लेकर जागरूकता गतिविधियों के माध्यम से लोगों को पानी बचाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। यही सामूहिक प्रयास बालोद को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में सफल रहा है।

*JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ देश में प्रथम*

जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। प्रदेश में तीसरे चरण के तहत 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज की गई हैं, जिनमें से 77 हजार 719 संरचनाओं का कार्य पूरा हो चुका है।

इस उपलब्धि में बालोद सहित प्रदेश के जिलों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इससे पहले अभियान के पहले चरण में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे और दूसरे चरण में भी दूसरे स्थान पर रहा था।

*छत्तीसगढ़ के पांच जिले टॉप-10 में*

जल संरक्षण के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ के पांच जिलों ने राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया है। सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।

इन जिलों में बालोद का स्थान बनाना जिले में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों और प्रभावी जनभागीदारी का परिणाम है।

*पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या में आई कमी*

जल संरक्षण के प्रयासों का सकारात्मक असर प्रदेश में दिखाई दे रहा है। छत्तीसगढ़ में पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। वहीं पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान है।

जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण, भू-जल पुनर्भरण, पुराने जल स्रोतों के संरक्षण और नियमित निगरानी से आने वाले समय में जल उपलब्धता को और बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

*राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण मॉडल की सराहना*

नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के जल संरक्षण मॉडल को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया गया।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे नवाचारों और जनभागीदारी आधारित प्रयासों की जानकारी साझा की। वहीं सम्मेलन के ‘कैच द रेन’ सत्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और पेयजल स्रोतों के संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को जोड़कर जल संरक्षण को जनअभियान बनाया गया है।

*बालोद के लिए गौरव का क्षण*

बालोद का देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल होना जिले के लिए गौरव की बात है। यह उपलब्धि बताती है कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और जनता की सक्रिय भागीदारी मिलकर बड़े बदलाव ला सकती है।

जिले में जल संरक्षण के कार्यों को आगे भी निरंतर जारी रखने और अधिक से अधिक लोगों को इस अभियान से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। बालोद की यह पहल आने वाले समय में जल सुरक्षा और ग्रामीण विकास की मजबूत नींव तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

‘बारिश की हर बूंद सहेजें, जल संरक्षण को जनभागीदारी से मजबूत बनाएं’ इसी संकल्प के साथ बालोद जल संरक्षण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहा है।

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