*हरेली से हरियाली तक धरती का आभार-भारतीय संस्कृति में प्रकृति, कृषि पशुधन ,वनस्पति,औषधीय वैद्य परंपरा और स्वत्व का सम्मान।*
परस साहू बालोद *विविधता में एकता:* कैसे पूरा देश एक ही दिन अलग-अलग नामों से मिट्टी और पौधों की पूजा करता है।भारत की पावन मातृभूमि पर त्योहार केवल उत्सव नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला हैं। श्रावण मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला हरियाली पर्व (छत्तीसगढ़ में हरेली, उत्तराखंड में हरेला) इसी बात का…

